लोकसभा चुनाव के बीच जननायक जनता पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष निशान सिंह कांग्रेस शामिल होने जा रहे हैं। इसके साथ फतेहाबाद, हिसार, सिरसा के अलावा अन्य जिलों से भी जजपा के कई पदाधिकारी कांग्रेस में शामिल होंगे। सरदार निशान सिंह करीब साढ़े पांच साल तक जजपा के प्रदेशाध्यक्ष रहे थे।
जननायक जनता पार्टी को छोड़ने के बाद पूर्व प्रदेशाध्यक्ष निशान सिंह 20 दिन बाद कांग्रेस पार्टी का दामन थामेंगे। निशान सिंह अपने समर्थकों के साथ सोमवार 29 अप्रैल को चंडीगढ़ में कांग्रेस ज्वाइन करेंगे। हालांकि, अभी तय नहीं हुआ है कि निशान सिंह गुटों में बंटी कांग्रेस के कौन से गुट में जाएंगे। निशान सिंह के नजदीकी और जजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र लेगा का दावा है कि उनके साथ फतेहाबाद, हिसार, सिरसा के अलावा अन्य जिलों से भी जजपा के कई पदाधिकारी कांग्रेस में शामिल होंगे।
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गौरतलब है कि पूर्व विधायक सरदार निशान सिंह करीब साढ़े पांच साल तक जजपा के प्रदेशाध्यक्ष रहे थे। साल 2018 में जननायक जनता पार्टी के गठन के बाद टोहाना के पूर्व विधायक सरदार निशान सिंह को प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
टोहाना में पूर्व मंत्री परमवीर सिंह की बढ़ेगी चिंता
टोहाना में पहले से कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर रहे पूर्व कृषि मंत्री परमवीर सिंह की चिंता बढ़ने वाली है। निशान सिंह के आने के बाद वह भी टोहाना सीट से विधानसभा चुनाव में दावेदारी करेंगे। ऐसे में दो बार चुनाव हार चुके परमवीर सिंह की टिकट कट भी सकती हैं। इसके अलावा परमवीर सिंह को छोड़कर और कांग्रेस में बड़े जनाधार वाला नेता नहीं है। ऐसे में निशान सिंह के शामिल होने से वह प्रमुख दावेदारों में होंगे।
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2000 में इनेलो के टिकट पर जीतकर बने थे विधायक
सरदार निशान सिंह साल 2000 में इनेलो के टिकट पर जीतकर टोहाना से विधायक चुने गए थे। उन्हें तब 43,076 वोट मिले थे। हालांकि इसके बाद उन्होंने इनेलो के टिकट पर लगातार तीन चुनाव लड़े। मगर कोई भी चुनाव नहीं जीत पाए। हर बार दूसरे स्थान पर रहे। साल 2005 व 2009 में उन्हें कांग्रेस नेता एवं पूर्व कृषि मंत्री परमवीर सिंह ने जबकि 2014 में भाजपा नेता सुभाष बराला ने शिकस्त दी।
2019 में देवेंद्र बबली के कारण टोहाना सीट से नहीं लड़ पाए
साल 2019 के चुनाव में टोहाना विधानसभा क्षेत्र से सरदार निशान सिंह जजपा की टिकट के प्रमुख दावेदार थे। मगर ऐन वक्त पर कांग्रेस की टिकट नहीं मिलने पर देवेंद्र सिंह बबली ने जजपा का दामन थाम लिया। बबली के मजबूत दावेदार होने के चलते पार्टी नेताओं ने निशान सिंह के स्थान पर देवेंद्र बबली को प्रत्याशी बनाया। बाद में बबली टोहाना से जीते और साल 2021 में प्रदेश की गठबंधन सरकार में पंचायत मंत्री भी बने।