फतेहाबाद। जिले में शुक्रवार को बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है। गांव सालमखेड़ा में ओलावृष्टि के निशान करीब 30 घंटे तक रहे थे। ऐसे में सरसों, सब्जी और बागवानी की फसल में 80 फीसदी तक का अनुमान लगाया जा रहा है।
हालांकि कृषि एवं कल्याण विभाग के अनुसार गेहूं की फसल में नुकसान का आकलन धूप निकलने के बाद ही लगाया जा सकेगा। जिसको लेकर किसानों ने भी सरकार से ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्र में स्पेशल गिरदावरी करवाकर हुए नुकसान का भरपाई करवाने मांग की है।
बता दें कि जिले में शुक्रवार को 13 गांवों में ओलावृष्टि हुई है। जिसमें जिले के गांव धांगड़, सालमखेड़ा, बड़ोपल, मोहम्मदपुर रोही, भिरडाना, बिसला, बरसीन, माजरा, ढाणी माजरा, झलनियां और जांडली खुर्द शामिल है। इसमें से गांव धांगड़ और बरसीन के आधे रकबे पर ओलावृष्टि हुई है।
जानकारी के अनुसार इन गांवों में लगभग 3750 एकड़ में सरसों की फसल है। इसके अलावा 250 एकड़ के आसपास रकबे में सब्जियों व बागवानी की फसल है। जिसमें से 3500 एकड़ सरसों के रकबे पर ओलावृष्टि हुई है। जिसको लेकर किसान कर्मजीत, रण सिंह, पवन, सुधीर, अनमोल, दिलबाग और छल्लूराम आदि ने बताया कि इन दिनों सरसों की फसल में फूल आ चुके थे लेकिन ओलावृष्टि से सरसों की फसल पूरी तरह से टूट चुकी है।
ओलावृष्टि से सरसों की फसल में 80 प्रतिशत तक का नुकसान है। वहीं इन गांवों में आलू, गोभी, टमाटर और मटर का करीब 170 एकड़ रकबा है। जिसमें टमाटर, गोभी और मटर में 90 फीसदी तक नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में किसानों ने प्रदेश सरकार से आर्थिक सहायता की मांग की है।