फतेहाबाद। वीरवार शाम को मौसम में आए बदलाव के चलते जाखल और टोहाना क्षेत्र में करीब 15 मिनट तक ओलावृष्टि हुई। इससे गेहूं और सरसों की फसल के साथ सब्जी की खेती में नुकसान होने आशंका है। जाखल और टोहाना क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों में शाम 6 बजे के करीब ओलावृष्टि हुई है।
टोहाना में ओलावृष्टि करीब 9 मिनट और जाखल में 15 मिनट तक जारी रही। ओलावृष्टि और बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। वहीं ओलावृष्टि और बारिश से मौसम में ठंडक महसूस की गई। स्थानीय निवासियों खुशीराम और शिवकुमार ने बताया कि वीरवार शाम को अचानक से मौसम बदल गया। इससे पहले तेज हवाएं चली, फिर बारिश हुई और कुछ देर बाद ही ओले गिरने लगे।
बता दें कि मौसम में आए परिवर्तन के चलते पिछले तीन दिनों से बादलवाही जारी है। इसके चलते बुधवार को दिनभर छाए रहे, शाम को हल्की बूंदाबांदी हुई है। वहीं वीरवार को 16 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली हवा से जिले के अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज हुई है।वीरवार को जिले का अधिकतम तापमान 24 डिग्री और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया है। इसके कारण दिन के समय भी ठंड का अहसास हुआ। वीरवार रात्रि को हुई बूंदाबांदी के साथ चली तेज हवा से कुछ स्थानों पर जिन किसानों ने गेहूं की फसल की सिंचाई कर रखी थी, वह प्रभावित हुई। इसको लेकर जिले के किसान मंगतराम, साधूराम, धीरज, महेंद्र, गुरदयाल और लालचंद आदि ने बताया कि बारिश होने फसलों को फायदा है, लेकिन यदि बारिश के साथ तेज हवा चलती है तो इससे फसलों में नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है।
वहीं मौसम में आए परिवर्तन को लेकर सहायक कृषि अधिकारी डॉ. बहादुर सिंह ने बताया कि इन दिनों यदि बारिश है तो फसलों के लिए संजीवनी का काम करेगी। इससे जिले में ठंड कुछ दिन के और बढ़ जाएगी। जिससे गेहूं व सरसों की फसल का पकाव अच्छा होगा। इससे फसलों का उत्पादन बढ़ेगा। बारिश से फसलों में रोगों का प्रकोप भी कम होगा।
:: बुधवार देर रात्रि से पश्चिमी विक्षोभ के वीरवार काे कहीं-कहीं बूंदाबांदी व हल्की बारिश हो सकती है। इसके बाद 21 से लेकर 26 फरवरी तक मौसम खुश्क रहेगा। वहीं 26 फरवरी के बाद एक और मजबूत पश्चिमी विक्षोभ आने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में बारिश होने की संभावना है। पहाड़ी क्षेत्र की ओर हवा चलेगी, इससे रात्रि के तापमान में गिरावट दर्ज होगी। इसी बीच एक और कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिसका प्रभाव कम रहेगा।
-डॉ. मदनलाल खिचड़, विभागाध्यक्ष, मौसम विज्ञान विभाग, एचएयू हिसार