फतेहाबाद। जिले में उच्च शिक्षा के लिए सीटों की कमी नहीं है लेकिन दूर-दराज से आने वाले विद्यार्थियों के सामने रहने की समस्या अब भी बड़ी चुनौती है। जिले के 10 महाविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के लिए करीब 5770 सीटें हैं।
इसके बावजूद छात्रावास की सुविधा केवल दो कॉलेजों में उपलब्ध है। ऐसे में विद्यार्थियों को पीजी, किराये के कमरों या अन्य निजी व्यवस्थाओं का सहारा लेना पड़ रहा है। राजकीय महिला महाविद्यालय भोडिया खेड़ा में 90 छात्राओं के रहने की व्यवस्था है। फिलहाल यहां 22 छात्राएं रह रही हैं।
एमएम पीजी कॉलेज में भी छात्रावास की सुविधा उपलब्ध है। धांगड़ और जमालपुर शेखां स्थित दोनों बहुतकनीकी संस्थानों में छात्रावास की सुविधा नहीं है। कई विद्यार्थी करीब 150 किलोमीटर दूर से आकर तकनीकी शिक्षा हासिल कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें किराये के कमरे या अन्य निजी व्यवस्था का सहारा लेना पड़ता है। संवाद
जिले के कॉलेजों में सीटों का ब्योरा
डिफेंस डिग्री कॉलेज टोहाना - 560
राजकीय महाविद्यालय भट्टूकलां - 440
राजकीय महाविद्यालय भूना - 495
राजकीय महाविद्यालय जिला मुख्यालय - 320
राजकीय महाविद्यालय रतिया - 420
राजकीय महाविद्यालय टोहाना - 1030
राजकीय महिला महाविद्यालय भोडिया खेड़ा - 820
राजकीय महिला महाविद्यालय रतिया - 400
एमएम पीजी कॉलेज फतेहाबाद - 1385
श्री दुर्गा महाविद्यालय टोहाना - 460
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दो कॉलेजों में ही हॉस्टल की सुविधा
जिले के 10 महाविद्यालयों में प्रथम वर्ष की करीब 5770 सीटें हैं। इनमें राजकीय महिला महाविद्यालय भोडिया खेड़ा और एमएम पीजी कॉलेज में ही छात्रावास की सुविधा है। राजकीय महिला महाविद्यालय की प्रिंसिपल लखबीर कौर ने बताया कि छात्रावास में 90 छात्राओं के रहने की व्यवस्था है। फिलहाल 22 छात्राएं रह रही हैं। दाखिला लेने वाली छात्राओं को ही यह सुविधा दी जाती है।
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बहुतकनीकी संस्थानों में भी नहीं हॉस्टल
जिले में दो बहुतकनीकी संस्थान है। यहां पर जिले से 150 किलोमीटर दूर से आकर विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन उनके लिए हॉस्टल सुविधा नहीं है। तकनीकी शिक्षा के लिए गांव धांगड़ और जमालपुर शेखां में बहुतकनीकी संस्थान है।
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बहुतकनीकी पुराने संस्थानों में हॉस्टल की सुविधा है लेकिन नए में फिलहाल नहीं है। मुख्यालय स्तर पर ही हॉस्टल को लेकर फैसला लिया जाता है।
- राजीव सरदाना, प्राचार्य, बहुतकनीकी संस्थान धांगड़
हॉस्टल सुविधा के लिए निर्णय मुख्यालय से ही लिया जाता है। नए भवन के निर्माण के दौरान ही इसके लिए प्रावधान निर्धारित होता है।
- वीरेंद्र पाल सिंह, जिला उच्चतर शिक्षा अधिकारी।