फतेहाबाद। पिछले तीन दिनों से मनोहर मेमोरियल कॉलेज में चल रहे गीता जयंती महोत्सव का रविवार को समापन हो गया। अंतिम दिन पंडाल में श्रीकृष्ण-अर्जुन और दुर्योधन-शकुनी के संवाद गूंजते रहे। रविवार सुबह से वृंदावन और मथुरा से आए कलाकारों ने समारोह में दर्शकों को बैठने पर मजबूर कर दिया। द्रोपदी चीरहरण और राधा-कृष्ण के नृत्य के जीवंत दृश्यों ने भी दर्शकों को खींचे रखा। समारोह में कलाकारों ने महाभारत के दृश्यों की प्रस्तुति से वाहवाही लूटी। समापन समारोह के मुख्यातिथि बिजली एवं जेल मंत्री रणजीत सिंह रहे।
समारोह के अंतिम दिन मथुरा और वृंदावन से आए करीब 40 कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी। इसके अलावा महाभारत के संवाद भी प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में महिलाओं की मटका रेस, नींबू रेस, म्यूजिक रेस करवाई गई। समारोह में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की 10 स्टालें लगाई गई थी, जिनमें ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाए गए घरेलू उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अलावा एक स्टाल ऐसा था जिसमें परंपरागत रुप से कच्ची मिट्टी से बनाया गया था, इनमें ग्रामीण महिलाएं बाजरे की रोटी, सरसों का साग, घी-शक्कर भी मुख्य अतिथियों को खिलाए गए। बागवानी विभाग द्वारा यहां किन्नू, अमरूद, शहद की प्रदर्शनी लगाई गई। यह दो प्रदर्शनियां उल्लेखनीय थी।
गीता का महत्व समझना है तो कुरुक्षेत्र की भूमि के दर्शन करें : चौटाला
बिजली, जेल एवं ऊर्जा मंत्री चौ. रणजीत सिंह चौटाला ने कहा कि यदि किसी को गीता का महत्व समझना है कि एक बार कुरुक्षेत्र की भूमि का दर्शन करें तभी जाकर पता चलेगा कि हरियाणा की इस रणभूमि का महत्व क्या है। जहां श्रीकृष्ण ने लोगों गीता का उपदेश देकर धर्म औरकर्म की राह बताई। उन्होंने कहा कि महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद जब लोग पांडवों का स्वागत करने लगे तभी भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि युद्ध के दौरान आपके तीर कौरवों की सेना को मार रहे थे और कौरवों के तीरों से सुदर्शन चक्र ही उनकी रक्षा कर रहा था। इसका अर्थ यह है कि जब व्यक्ति को धर्म-कर्म के मार्ग पर भगवान की शरण लेते है। उनकी रक्षा करना भी भगवान का ही कर्तव्य बन जाता है।
मुख्य अतिथि को गीता भेंट की
अतिरिक्त उपायुक्त महावीर प्रसाद, डीआईपीआरओ आत्माराम और एआईपीआरओ विनय बैनीवाल ने मुख्यातिथि को गीता भेंट की। इससे पूर्व कार्यक्रम में प्रो. आरके शर्मा ने गीता के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा राज नहीं होना चाहिए जिसकी नींव अपनों की लाशों पर हो। लेकिन धर्म और कर्म दो अलग-अलग रास्ते हैं जिसमें भावना का सम्मान जरूरी है। प्रारंभ में कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक प्रवक्ता सुदामा शास्त्री ने हवन यज्ञ करके किया। समारोह में मुख्यातिथि ने मथुरा और वृंदावन से आए कलाकारों तथा समारोह में भाग लेने वाले स्कूली बच्चों को सम्मानित भी किया।
पराली से बनीं स्टॉलें रहीं आकर्षण का केंद्र
गीता जयंती समारोह पिछले कई वर्षों से मनाया जा रहा है, लेकिन इस बार इसका अंदाज अनोखा था। पराली की स्टालें, कच्ची मिट्टी के बर्तनों का प्रदर्शन, हरियाणवी खाना के अलावा स्टालों में पोस्टा ऑफिस, प्राथमिक उपचार केंद्र, ई-दिशा केंद्र तथा घरेलू उत्पाद अलग पहचान बने हुए थे। समारोह के खर्च के लिए प्रदेश के सांस्कृतिक विभाग ने 15 लाख रुपये का बजट भेजा था। जिला लोक संपर्क अधिकारी आत्माराम के अनुसार अभी खर्च का अंदाजा लगाना शेष है।
पांच साल की पल्लवी ने किया भजन प्रस्तुत
कार्यक्रम में वृंदावन से आए कलाकारों ने महाभारत पर नाटक प्रस्तुत किए। समारोह में 5 साल की पल्लवी शर्मा ने जय श्यामा तू है नंदलाला भजन प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। जवाहर नवोदय विद्यालय खाराखेड़ी के विद्यार्थियों ने श्रीकृष्ण लीला पर नाटिका, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भूना, अपैक्स कान्वेंट स्कूल, शेखुपुर दड़ौली के सरकारी स्कूल आदि ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। प्रतिभागी विद्यार्थियों को मुख्यातिथि ने स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर डीईओ दयानंद सिहाग, एलडीएम अनिल मीणा, जिला परिषद के चेयरमैन राजेश कस्वां एडवोकेट संत कुमार टूटेजा, भाजपा नेता मनीष मैहता, नरेश सरदाना, रम्मी गिल्होत्रा, रामराज मेहता, यश तनेजा, शिव कुमार, अवतार मोंगा, महेश शर्मा मौजूद रहे।