सरकार ने पिछले वर्ष इसे 30 बेड से बढ़ाकर 60 बेड का करते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से सामान्य अस्पताल का दर्जा भी दे दिया।
डॉक्टर
के पद बढ़ाकर सात से चौदह कर दिए लेकिन हालात वही के वही हैं। लगभग एक लाख
की आबादी का यह सामान्य अस्पताल मात्र एक डॉक्टर के सहारे चल रहा है।
मरीजों
को जाच करवाने के लिए ही लाइन में लगकर धक्का-मुक्की सहनी पड़ती है। फिर
दवाइयों के लिए लाइनों में लगकर दवाइयां लेनी पड़ती है। एसएमओ को ही
इमरजेंसी ड्यूटी भी देनी पड़ती है।
अस्पताल में मौजूद एक मात्र
एक्स-रे मशीन भी काफी पुरानी है। एक्स-रे मशीन से हर रोज लगभग 20 एक्स-रे
ही हो पाते हैं। लेकिन अस्पताल में आने वाले मरीजों के अनुसार 40 एक्स-रे
की डिमांड है।
विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी
यहा पर 14
डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। लेकिन अस्पताल में एक एसएमओ ही तैनात है तथा
दो डाक्टरों की सेवाएं डेपुटेशन के तहत ही मिली हुई है।
अस्पताल मे
स्त्री रोग, छाती रोग, हड्डी रोग, दंत विशेषज्ञ, सर्जन और ईएनटी जेसे
स्पेशलिस्टों का अभाव होने के कारण मरीजों को अनेकों परेशानियों का सामना
करना पड़ता है। वही सरकारी कामकाज के चलते अस्पताल में अक्सर एक डॉक्टर की
ही मौजूदगी रहती है।
अस्पताल में नहीं है ब्लड बैंक और शव गृह
सामान्य
अस्पताल होने के बावजूद भी अस्पताल में अस्पताल में ब्लड बैंक व शव गृह की
कमी है। हालांकि अस्पताल में शव गृह की विभाग ने बिल्ंिडग तो बना दी है,
लेकिन उसे पिछले कई सालों से शुरू नहीं किया गया है। हालत यह है की पिछले
कई समय से शव गृह की बनी बिल्ंिडग में स्टाफ नर्स की रिहायश बनी हुई थी।
क्या कहते है एसएमओ
एसएमओ
डॉक्टर विजय जैन से बात की गई तो उन्होंने कहा की पिछले वर्ष सामान्य
अस्पताल का दर्जा मिल गया है, लेकिन डॉक्टरों की अभी कमी है जिसके लिए
विभाग को कई बार लिख चुके हैं।
वहीं उन्होंने माना की उनकी एक्सरे
मशीन काफी पुरानी है जिसके कारण मरीजों का एक्सरे करवाने के लिए दिक्कतें
आती हैं। अस्पताल में बेडों को बढ़ाने के लिए नई बिल्ंिडग बनाई जानी है,
जिसके लिए 86 लाख रुपये भी मंजूर हो गए हैं और जल्द ही शव गृह भी शुरू करवा
दिया जाएगा।