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रिचार्जिंग बोर पर जमा रहा कूड़ा, शहर में घुटनों तक भरा पानी तब जागा प्रशासन

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रतिया क्षेत्र में बनाया गया वाटर रिचार्जिंग सिस्टम। - फोटो : Fatehabad
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शहर में इस सीजन में 150 एमएम बारिश होने के बाद प्रशासन की नींद टूटी है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद सरकार ने येलो अलर्ट जारी किया, लेकिन जलभराव से बचाने के जिम्मेदार विभागों ने कोई तैयारी नहीं की। शहर में सीवरेज के ढक्कन तक साफ नहीं किए गए। शहर में पांच जगहों पर बने रिचार्जिंग बोर पर भी कचरा जमा रहा। अब जब बारिश के बाद घुटनों तक पानी भर गया तो प्रशासन की भी नींद खुली।
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भारी बारिश के बाद करीब छह घंटे तक पानी की निकासी नहीं हो पाई। इसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने कर्मचारियों को लगाकर रिचार्जिंग बोर खुलवाए। इन पर रिचार्जिंग बोर पर जमे कचरे को लंबे समय से साफ नहीं किया गया था। शहर में अग्रवाल कॉलोनी, भट्टूकलां रोड, पंचायत भवन, नगर परिषद कार्यालय व जवाहर चौक समेत कुल पांच जगहों पर रिचार्जिंग बोर लगे हुए हैं। साफ सफाई के अभाव में इन पर कचरा जम जाता है और पॉलीथिन आदि फंस जाते हैं। दावा है कि अब इनके खुलने से पानी की निकासी आसान होगी और जल संरक्षण भी होगा। इन रिचार्जिंग बोर की सफाई का जिम्मा नगर परिषद प्रशासन के पास है।
लघु सचिवालय में भी नहीं कोई रिचार्जिंग सिस्टम
जिले में ढिंढोरा पीटकर लोगों को बरसाती पानी का संरक्षण करने का ज्ञान देने वाले प्रशासन के मुख्य अधिकारियों के जहां कार्यालय बने हुए हैं, उस लघु सचिवालय में भी बारिश के पानी को संरक्षित करने का कोई प्रोजेक्ट नहीं लगा है। यहां तक कि सरकार ने सभी सरकारी विभागों में बरसाती पानी का संचयन करने के लिए व्यवस्था करने के निर्देश दिए हुए हैं। जनस्वास्थ्य विभाग ने अपने कार्यालय में रिचार्जिंग सिस्टम लगवाने की कोशिश की थी, लेकिन अब यह प्रोजेक्ट अधूरा ही पड़ा है।
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2018 में लगाए जाने थे 13 बोर, नगर परिषद ने कर दिया मना
जून 2018 में शहरी निकाय विभाग ने नगर परिषद को पत्र लिखा था कि अपने शहर में वाटर रिचार्ज सिस्टम लगवाएं। सरकार ने फतेहाबाद शहर में 13 सिस्टम, टोहाना शहर में 13, रतिया व भूना में 7-7 बोरवेल लगाने की योजना तैयार की थी। जिले में कुल 40 यूनिट लगाई जानी थी। तब फतेहाबाद नगर परिषद के तत्कालीन ईओ अमन ढांडा ने जवाब में लिखा कि फतेहाबाद में बरसानी पानी की निकासी की दिक्कत नहीं है। इसलिए रिचार्ज बोर की जरूरत नहीं है। जो पांच रिचार्जिंग बोर बने हुए हैं, उन्हें बनाए भी लंबा अरसा बीत चुका है।
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160 गांवों में बनाए जा रहे बोरवेल
रतिया क्षेत्र के गांवों में 160 बोरवेल लगाए जा रहे हैं, जिन पर कुल चार करोड़ 80 लाख रुपये लागत आएगी। एक बोरवेल पर करीब तीन लाख रुपये खर्च होंगे। इन बोरवेल का लक्ष्य यही है कि बारिश के पानी को जमीन में उतारा जाएगा ताकि भूजल स्तर सुधारा जा सके।
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2500 सोक पिट बनाने का लक्ष्य
जल संरक्षण के लिए जिले में 2500 सोक पिट बनाने का लक्ष्य है। प्रशासन का दावा है कि कि सोक पिट बनाने का 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। सोक पिट यानी पानी को सोखने वाले गड्ढे बनाए जाएंगे। जिला में 1750 सोक पिट बनाए जा चुके हैं। बाकी भी जल्द बनाए जाएंगे।
कोट
बारिश शुरू होने से पहले हमने काफी जगहों पर सीवरेज के ढक्कनों से कचरा हटा दिया था। मगर बारिश एकदम ज्यादा आ गई। पानी की निकासी के लिए बंद पड़े रिचार्जिंग बोर खुलवाए हैं। चूंकि साल भर इनकी संभाल नहीं होती, इसलिए कचरा जम जाता है। अब इनकी नियमित साफ सफाई रखी जाएगी ताकि जल संरक्षण हो सके।
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-मुकेश कुमार, सफाई निरीक्षक, नगर परिषद।

रिचार्जिंग बोर से कचरा हटाते नगर परिषद के कर्मचारी।- फोटो : Fatehabad

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