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प्रदूषण प्रमाण पत्र बनाने में फर्जीवाड़ा, 1 बाइक, 3 रिपोर्ट, तीनों अलग

Sun, 13 Dec 2015 11:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला फतेहाबाद
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फतेहाबाद में फर्जी तरीके से प्रदूषण प्रमाण पत्र बनाने का खेल चल रहा है। इस फर्जीवाड़े में न तो आपकी बाइक को चेक किया जाता है और न ही उसे चलवाकर देखा जाता है।
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बस काउंटर पर बाइक खड़ी कीजिए, फोटो खिंचवाइए और हाथोंहाथ प्रदूषण प्रमाण पत्र तैयार। हैरत तो इस बात की है कि एक काउंटर पर तो बाइक को देखा ही नहीं गया, बस पैसे दिए और हाथ से लिखा हुआ प्रदूषण प्रमाण पत्र तैयार, इस गारंटी के साथ कि आपका चालान नहीं कटेगा।

पर्यावरण खराब होगा या नहीं, इसकी कोई फिक्र नहीं। अमर उजाला ने शहर के तीन प्रमुख प्रदूषण जांच केन्द्रों पर एक ही दिन में महज 30 मिनट के अंदर बाइक की जांच कराई।
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हैरत ये रही कि तीनों जांच केन्द्रों से एक ही बाइक की अलग अलग रिपोर्ट जारी की गई।

पहला केस
स्थान: बस स्टैंड के बिल्कुल साथ लगते बंद पेट्रोल पंप का जांच केन्द्र (अधिकृत केंद्र कोड-एफटीडी-पी-0011)
समय : दोपहर बाद 3 बजकर 30 मिनट
प्रदूषण का स्तर प्रमाण पत्र मुताबिक : 1.90 प्रतिशत
प्रदूषण जांच केन्द्र पर बाइक पहुंची। लाइट न होने के कारण कंप्यूटर बंद था। संचालक ने बाइक चालक को अंदर बुला लिया और एक कॉपी उठाई और छपे-छपाए प्रदूषण प्रमाण पत्र पर बाइक की डिटेल भर दी और पकड़ा दिया।

इस दौरान बाइक साइड में खड़ी होने के कारण प्रदूषण जांच केन्द्र संचालक ने बाइक को देखा तक नहीं। प्रदूषण जांच करने का तो सवाल ही नहीं। जब प्रदूषण चेक करने बारे कहा गया तो जवाब था कि ये प्रमाण पत्र चल जाएगा, कोई चालान नहीं काटेगा। फीस ली गई पचास रुपये।

दूसरा केस
स्थान: खुशी राम पेट्रोल पंप पर स्थित प्रदूषण जांच केंद्र (अधिकृत केन्द्र कोड-एफटीडी-पी-0015)
समय : दोपहर बाद 3 बजकर 50 मिनट
प्रदूषण का स्तर प्रमाण पत्र मुताबिक : 2.3 प्रतिशत
केन्द्र पर बाइक पहुंची। बूथ के अंदर बैठे कारिंदे ने अंदर से ही हाथ निकाल कर वेब कैमरे से बाइक का फोटो खींचा। बाइक मालिक से पूछ कर बाइक का मॉडल मशीन में फीड किया।

एक मिनट बाद मशीन से कंप्यूटरीकृत प्रदूषण पत्र बनकर बाहर आ गया। पूछा गया कि बाइक तो चेक हुई ही नहीं तो प्रमाण पत्र कैसे आया तो जवाब मिला कि औसत प्रदूषण स्तर का प्रमाण पत्र बनाकर दिया है। इससे चालान नहीं कटेगा। फीस ली गई 60 रुपये।


तीसरा केस
स्थान: हिसार रोड पर हरमिन्द्र सिंह पेट्रोल पंप स्थित जांच केंद्र (अधिकृत केन्द्र कोड-एफटीडी-पी-0013)
समय : 4 बजे सांय
प्रदूषण का स्तर प्रमाण पत्र मुताबिक : 1.147 प्रतिशत
 केंद्र पर बाइक पहुंची। सवार ने बाइक बंद की तो जांच केन्द्र संचालक ने बाइक चालू रखने को कहा। खुद बाहर आकर बाइक के सायलेंसर में एक पाइप डाली। तकरीबन 2 से तीन मिनट तक नियमानुसार बाइक का प्रदूषण स्तर सही तरह से जांचा।

इसके बाद बाइक की आरसी मांगी ताकि सही मॉडल कंप्यूटर में फीड किया जा सके। तकरीबन 15 मिनट के प्रोसेस के बाद संचालक ने कंप्यूटरीकृत फोटो युक्त प्रमाण हाथ में दिया। फीस ली गई 30 रुपये।

ये हैं बाइक प्रदूषण जांच केन्द्र के नियम
1. जांच केंद्र संचालक के पास हरियाणा का रिहाइशी प्रमाण पत्र हो।
2. केंद्र में प्रदूषण जांच के लिए स्मोक मीटर होना चाहिए, जिसे गाड़ी के सायलेंसर पर लगाकर प्रदूषण मापा जाए।
3. प्रदूषण जांचकर्ता के पास इलेक्ट्रिकल का डिप्लोमा होना चाहिए।
4. कम से कम 10 गज जगह होनी चाहिए।
5. डिजिटल कैमरा होना चाहिए।

ये है सच्चाई
1. जांच केन्द्र संचालक प्रशासन से आवेदन तो खुद करते हैं, लेकिन बाद में कोई कारिंदा बिठा दिया जाता है।
2. फतेहाबाद में महज एक जांच केन्द्र पर ही स्मोक मीटर पाया गया।
3. कारिंदों के पास किसी प्रकार का कोई डिप्लोमा नहीं।
4. महज 4 फुट के एक केबिन में बैठकर प्रदूषण जांच केन्द्र चलाया जाता है।

प्रदूषण के चालान से बचने के लिए बनवाते हैं प्रमाण पत्र
दरअसल ट्रैफिक पुलिस द्वारा प्रदूषण प्रमाण न होने पर हजार रुपये का चालान किया जाता है। इस चालान से बचने के लिए वाहन चालक इन जांच केंद्रों पर मामूली फीस देकर प्रदूषण प्रमाण पत्र बनवा लेते हैं।

ट्रैफिक पुलिस के पास भी प्रदूषण जांच के लिए कोई उपकरण नहीं है तो मजबूरी में उसे प्रमाण पत्र के आधार पर ही वाहन चालक को छोड़ना पड़ता है।

ये गंभीर मामला है। बिना वाहन जांचे प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जा सकते। अगर ऐसा हो रहा है तो इसकी जांच कराएंगे और दोषी जांच केन्द्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।
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नरेन्द्र पाल, आरटीए सचिव, फतेहाबाद ।
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