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फोरलेन, बाईपास और आवासीय सेक्टर खा गए हरियाली

Thu, 07 Jul 2016 11:56 PM IST
fatehabad
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फतेहाबाद के बीघड़ रोड पर काटा गया आवासीय सेक्टर, जिसमें सारे पेड़ काट लिए गए हैं। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अमित रूखाया। फतेहाबाद जिले में भले ही फोरलेन और बाइपास के निर्माण के साथ विकास की बयार बहती दिख रही हो या फिर विभिन्न इलाकों में आवासीय सेक्टर और टाउनशिप के सहारे सरकार और जिला प्रशासन आम आदमी के जीवन स्तर पर को और बेहतर करने के दावे किए जा रहे हों, लेकिन इसके लिए जिले को एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। बीते सालों में वन विभाग की करीब 200 एकड़ भूमि विभिन्न प्रोजेक्ट्स की भेंट चढ़ गई है।


इनमें फतेहाबाद शहर के बीचोंबीच से निकल रहे फोरलेन एवं बाईपास में तकरीबन 100 एकड़ जमीन शामिल है। पिछले कई सालों से औसतन जिले को दो करोड़ के आसपास पौधारोपण एवं उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए मिलता रहा है, लेकिन इस बार सरकार ने भी कंजूसी दिखाई और पिछले कई सालों के मुकाबले इस बार ग्रांट भी काफी कम मिले हैं। अब वन विभाग के अधिकारी क्षतिपूर्ति के लिए इस साल लगभग पांच लाख पौधे लगाकर बाकी बचे वन संरक्षित क्षेत्र का घनत्व बढ़ाना चाहते हैं। वन विभाग बेहतर मानसून के सहारे इसको पूरा करने को लेकर आशावान है। हालांकि विभाग के अधिकारी इतना जरूर मानते हैं कि जिस रफ्तार से कंक्रीट के जंगल बढ़ रहे हैं, हरित क्षेत्र को बचाने के लिए हर घर हरित क्रांति की जरूरत होगी।
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आवासीय सेक्टर कटने से भी हरियाली को भयंकर नुकसान
फतेहाबाद जिले में कई जगह हुडा एवं अन्य टाउनशिप के सेक्टर काटे गए हैं। इनके विकास के लिए यहां पर लगाए गए सैकड़ों पेड़ों को काट दिया गया। हालांकि इसमें काफी जगह वन विभाग की नहीं थी, लेकिन पेड़ काटे जाने से जिले के हरियाली घनत्व को काफी नुकसान पहुंचा है। इनमें से अधिकतर आवासीय सेक्टर और टाउनशिप अभी तक पूरी तरह विकसित भी नहीं हुई हैं। बीघड़ रोड पर काटे गए सेक्टर के लिए ही यहां पर तकरीबन सवा सौ से अधिक पेड़ों के काटे जाने की आशंका है, लेकिन सेक्टर के लिए नीलामी होने के महज एक माह के भीतर अधिकतर लोगों ने अपने प्लाट वापस सेरेंडर कर दिए। अब यहां पर वीरानी छाई रहती है। हरियाली के नाम पर सेक्टर की सड़कों के ईर्द-गिर्द छोटी छोटी झाड़ियां हैं, जो बारिश के चलते अपने आप उग आई हैं।

जिले भर में पेट्रोल पंप और रास्तों के चलते भी घटा वन विभाग का संरक्षित क्षेत्र
वन विभाग के सरकारी आंकड़ों की बात की जाए तो सड़कों और बाइपास के अलावा पेट्रोल पंपों के निर्माण ने भी संरक्षित वन क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचाया है। वन विभाग के सूत्रों की मानें तो पेट्रोल पंपों एवं रास्तों के अंदर भी वन विभाग की तकरीबन 80 से 100 एकड़ जमीन उनके हाथ से निकल चुकी है। हालांकि वन विभाग के अधिकारी अब इन पेट्रोल पंप मालिकों को अपने पंप के साथ पेड़ लगाने का आह्वान जरूर कर रहे हैं।

नेशनल हाइवे विभाग ने पेड़ों से भरी जमीन ले ली, बदले में खाली जमीन थमा दी
फोरलेन सड़क एवं बाइपास के निर्माण में जुटा नेशनल हाइवे विभाग ने वन संरक्षित क्षेत्र के अधिग्रहण के बदले वन विभाग को तकरीबन 37 एकड़ जमीन लौटाई तो है, लेकिन बिल्कुल खाली। अब वन विभाग इसे संरक्षित क्षेत्र बनाने का प्रयास शुरू करेगा। हालांकि इसमें काफी समय लगेगा। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो नेशनल हाइवे ने ये अनुमति तो दे दी है कि फोरलेन के निर्माण के बाद सड़क किनारे पौधे लगाए जा सकते हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी लिखित में ले लिया है कि भविष्य में सड़क को और चौड़ा करने का प्रयास हुआ तो विभाग की अनुमति के बिना इन पेड़ों को काटा जा सकेगा।

वन संरक्षित इलाके में छह लाख नंबरिंग वाले पौधे
वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो वन विभाग के पास जो संरक्षित वन क्षेत्र है उसमें तकरीबन ऐसे छह लाख पौधे हैं जो सही अवस्था में हैं और उनकी बाकायदा नंबरिंग की जा चुकी है। इसके अलावा इस साल के आखिर तक लगभग पांच लाख और पौधे लगाने की योजना विभाग बना चुका है।
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फोरलेन-बाइपास एवं पेट्रोल पंपों और रास्तों को जमीन देने के कारण वन संरक्षित इलाके की लगभग 200 एकड़ जमीन जा चुकी है। हालांकि नेशनल हाइवे ने लगभग 15 हेक्टेयर भूमि दूसरी जगह वापस दी है, लेकिन उसे भी तो दोबारा से तैयार करना होगा। फिर भी बेहतर मानसून की सहायता से इस बार हम पांच लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखे हैं। ऐसा होता है तो इससे वन क्षेत्र के घनत्व में बढ़ोतरी होगी।
एनके रंगा, जिला वन अधिकारी, फतेहाबाद ।

 
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