फतेहाबाद। जिले के चार मुद्दों ने इंडिया गठबंधन की प्रत्याशी कुमारी सैलजा की जीत का मार्ग खोलने का काम किया। भाजपा ने जैसे ही चार पार्टियां बदल चुके डॉ. अशोक तंवर को टिकट थमाई, तभी से कुमारी सैलजा को कांग्रेस की टिकट दिलाने का माहौल बनने लगा। जैसे-जैसे चुनाव ने जोर पकड़ा, वैसे-वैसे स्थानीय मुद्दे हावी होने लगे। इन स्थानीय मुद्दों के सामने न राम मंदिर बनाने और न ही अनुच्छेद 370 हटाने का जोर चल पाया।
सबसे पहले अशोक तंवर के बार-बार पार्टियां बदलने के मुद्दे को हावी किया गया। इसके बाद किसान संगठनों ने रतिया, जाखल व फतेहाबाद के गांवों में विरोध शुरू कर दिया। जहां-जहां किसान संगठनों ने विरोध किया, उनमें से अधिकतर गांवों में भाजपा को हार मिली है। इस विरोध के दौरान गांव पिछलियां और जाखल में किसानों पर केस दर्ज करवाने के बाद माहौल और सत्ता विरोधी हो गया। पहले विधायक चुनाव, फिर नगर परिषद चेयरमैन और अब फिर से सांसद चुनाव में पार्टी से बाहर के व्यक्ति को टिकट थमाने से भाजपा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में भी अंदरुनी विरोध के भाव उठने लगे। इसी कारण चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के उत्साह में धार नजर नहीं आई। इसकी बानगी चुनाव प्रचार के अंतिम दिन मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रचार के दौरान भी देखने को मिली। संवाद
न चाहते हुए भी कांग्रेसियों को दिखानी पड़ी एकजुटता
वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस के नेताओं को न चाहते हुए भी एकजुटता दिखानी पड़ी। शहरी मतदाताओं के विपरीत ग्रामीण मतदाताओं में एक ही नारा बुलंद हुआ कि अशोक तंवर को सिर्फ सैलजा हरा सकती है। इसी नारे ने माउथ पब्लिसिटी बढ़ाने का काम किया। जनता के मूड को भांपते हुए कांग्रेस के हुड्डा गुट से लेकर रणदीप सुरजेवाला, किरण चौधरी व सैलजा गुट के नेताओं ने हर मंच पर एकजुटता दिखाने का प्रयास किया। इसका सकारात्मक संदेश गया।
किसान संगठनों के प्रभाव वाले क्षेत्र में जीती कांग्रेस
पगड़ी संभाल जट़्टा किसान संघर्ष समिति से जुड़े किसानों ने जिले में भाजपा प्रत्याशी व पार्टी के नेताओं का सबसे अधिक विरोध किया। किसानों के विरोध से प्रभावित गांवों में से 90 फीसदी में कुमारी सैलजा ने जीत हासिल की है। दूसरी तरफ सरपंच एसोसिएशन का समर्थन मिलने से भी गांवों में माहौल पूरी तरह भाजपा विरोधी बन गया।
बबली के समर्थन से टोहाना में एकतरफा हुआ माहौल
जजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष निशान सिंह, हरियाणा सरपंच एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष रणबीर गिल के समर्थन में आ गए। इससे पहले हुड्डा व एसआरके गुट के नेता एकजुट हो गए। बाद में पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली द्वारा कांग्रेस का समर्थन करने से टोहाना में पूरी तरह माहौल एकतरफा हो गया। राज्यसभा सांसद सुभाष बराला यहां प्रचार में अकेले पड़ गए।
कोट
किसानों ने दिखाई वोट की ताकत
किसानों ने अपने मुद्दों को लेकर भाजपा प्रत्याशी व इस पार्टी के नेताओं से सवाल पूछने चाहे थे। मगर जवाब देने के बजाय किसानों पर ही मुकदमे दर्ज करवा दिए गए। किसानों ने वोट की चोट से भाजपा को अपनी ताकत दिखाने का काम किया है।
-मनदीप नथवान, प्रदेशाध्यक्ष, पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति
कोट
सरपंच बोले- विधानसभा चुनाव में भी हारेगी भाजपा
अगर भाजपा सरकार ने आने वाले दिनों में पंचायत को पूर्ण अधिकार नहीं दिए तो तीन महीने बाद विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को बड़ी हार का सामना करना पड़ेगा। लोकसभा चुनाव में सरपंचों ने भाजपा का डटकर विरोध किया। सरपंचों के अधिकार सरकार ने छीने हैं। सरकार ने हक वापस नहीं किए तो विधानसभा चुनाव में हार के लिए तैयार रहें।
-रणबीर गिल, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा सरपंच एसोसिएशन