फतेहाबाद। फतेहाबाद कृषि आधारित जिला है। इस कारण जिले में काफी संख्या में धान के शेलर लगे हुए हैं। मगर कोई बड़ा उद्योग नहीं होने के कारण लोगों को स्थायी रोजगार नहीं मिल पा रहा है। साल 2019 के चुनाव के बाद पांच साल भी बड़े उद्योग के इंतजार में ही बीत गए।
बड़ा उद्योग लग नहीं रहा है और छोटे उद्योगों को भी बचाने के लिए प्रशासन और सरकार की कोई दिलचस्पी नहीं रही है। पांच साल के कार्यकाल में विधायक ने भी कोई ऐसा प्रयास नहीं किया, जिससे उद्योगों को सहूलियत मिलती नजर आए। पांच साल में मास्टर प्लान में शामिल किए गए औद्योगिक क्षेत्र तक को शुरू नहीं किया जा सका है। दरअसल, फतेहाबाद शहर में पहले काफी संख्या में कॉटन फैक्टरियां हुआ करती थीं, लेकिन आज के समय में एक भी काॅटन फैक्टरी नहीं चल रही है। जिले में सूक्ष्म उद्योग हैं, लेकिन बड़े उद्योग नहीं होने से जीवन स्तर का कोई उत्थान नहीं हो रहा है। मौजूदा सूक्ष्म उद्योग भी सरकार की उदासीनता का शिकार हो चुके हैं। कोई उद्योग बिजली कटौती झेल रहा है, तो कोई परिवहन की समस्या से जूझता है।
पलायन करने को मजबूर हो रहे उद्योगपति
जिले में उद्योगों के लिए मूलभूत सुविधाओं की कमी झेलने के कारण उद्योगपति पलायन को मजबूर हो रहे हैं। शहर के हिसार रोड पर बना अस्थायी औद्योगिक क्षेत्र अब सिकुड़ने लगा है। इसके दोनों तरफ आबादी बढ़ने के कारण फैक्टरियां शिफ्ट होने लगी है। सिरसा रोड पर लगे सूक्ष्म उद्याेग के संचालकों को भी बिजली, पानी, सीवर जैसी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्र के नाम पर सिरसा रोड पर जगह चिह्नित की हुई है। मगर वहां कोई भी सुविधा नहीं दी गई है। बढ़ती बेरोजगारी के कारण जिले के युवाओं को छोटी-छोटी नौकरियों के लिए भी हिसार, रोहतक, दिल्ली, फरीदाबाद, गुरुग्राम आदि जगहाें पर जाकर काम करना पड़ता है।
जिले में लगे हुए हैं सूक्ष्म उद्याेग
जिले की स्थिति ऐसी है कि यहां सिर्फ सूक्ष्म उद्योग ही हैं। जिले में उद्योग के नाम पर सिर्फ बिस्कुट फैक्टरी, चप्पल फैक्टरी, पाइप फैक्टरी व शेलर ही लगे हुए हैं। जो लघु उद्योग पहले जिले में लगे हुए थे, वो अब धीरे-धीरे बंद हो चुके हैं। कुछ उद्योग सुविधाओं के अभाव में दूसरे जिले में शिफ्ट हो चुके हैं। जिले में सबसे अधिक शेलर टोहाना उपमंडल क्षेत्र में हैं। फतेहाबाद जिला मुख्यालय ही नहीं बल्कि रतिया व टोहाना में भी कोई बड़ा उद्योग न होने से विकास को रफ्तार नहीं मिल पा रही है।
जिलावासी बड़े उद्योग के लिए लंबे समय से तरस रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में भी कोई नया उद्योग नहीं लगा है। इस कारण जिले के लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है। फतेहाबाद शहर में औद्योगिक क्षेत्र की घोषणा होने के बाद भी विकसित नहीं हो सका है। जो उद्योगपति उद्योग चला रहे हैं, उनको भी बिजली, पानी जैसी सुविधाएं नहीं मिल पा रही है।
- प्रेम मोंगा, दुकानदार
जिले को बने हुए 27 वर्ष हो गए हैं, लेकिन अभी तक कोई बड़ा उद्योग नहीं लग सका है। इसी मुख्य कारण जिले में सुविधाओं का अभाव है। फतेहाबाद शहर में औद्योगिक विकास तो बहुत दूर की बात है, यहां औद्योगिक क्षेत्र भी नहीं है। इस कारण उद्योगपतियों के लिए उद्योग चला पाना चुनौती से कम नहीं है।
- देवेंद्र, दुकानदार
जिला बनने के बाद अभी तक किसी भी नेता ने जिले में उद्योगों की ओर ध्यान नहीं दिया है। हर सरकार में सिर्फ हवाई बातें होती रही हैं। जिला अभी भी औद्योगिक विकास की बाट देख रहा है। इस कारण युवाओं को राेजगार के लिए हिसार, दिल्ली, रेवाड़ी और गुरुग्राम जैसी जगहों पर जाना पड़ता है।
- रोहित कुमार, दुकानदार
जिला बनने के 27 वर्षों के बाद भी फतेहाबाद जिला पिछड़े जिलों की सूची में शामिल है। इसका मुख्य कारण औद्योगिक विकास नहीं हो पाना है। ऐसे में जिले में रोजगार की काफी कमी है। उद्योगों को बढ़ावा नहीं मिल रहा है। लोगों को रोजगार की तलाश में दूसरे जिलों में जाना पड़ रहा है।
- नरेश कुमार, दुकानदार
:: प्रदेश सरकार ने उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए काफी प्रयास किए हैं। फतेहाबाद में औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने के लिए और प्रयास किए जाएंगे। बिजली, पानी, सीवर, सड़कों की व्यवस्था मजबूत की गई है। इंडस्ट्री लगाने के लिए भी सरकार से मांग की हुई है।
-दुड़ाराम, विधायक, फतेहाबाद