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पहले दिन पांच फीसदी विद्यार्थी ही पहुंचे स्कूल

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कक्षा में प्रवेश से पहले थर्मल स्क्रीनिंग कराते विद्यार्थी। - फोटो : Fatehabad
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कोरोना महामारी के चलते विद्यार्थियों के लिए छह माह से बंद पड़े स्कूल सोमवार को खुल गए। सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक जिले के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में कक्षा नौंवी से बारहवीं तक के विद्यार्थी परामर्श लेने के लिए पहुंचे। स्कूलों में विद्यार्थियों की गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइज करने के बाद कक्षाओं में एंट्री दी गई। पहले दिन जिले के स्कूलों में पांच से सात फीसदी ही विद्यार्थी पहुंचे। लेकिन पहले दिन स्कूलों की भी लापरवाही सामने आई है। शिक्षकों के बिना कोरोना टेस्ट के परामर्श के लिए विद्यार्थियों को स्कूल बुला लिया गया। यहां तक कि ढाई से तीन घंटे की कक्षाएं भी लगाई गई।
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जबकि शिक्षा विभाग के आदेश थे कि स्कूल लगाने से पहले शिक्षकों के कोरोना टेस्ट करवाने जरूरी है। लेकिन अभी तक मात्र आठ फीसदी शिक्षकों के ही कोरोना टेस्ट हो पाए हैं। शिक्षा विभाग ने पोर्टल पर स्कूल में आए विद्यार्थियों का डाटा थर्मल स्क्रीनिंग के रिकार्ड के साथ भेजा है। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 31455 विद्यार्थियों में से 1572 विद्यार्थी परामर्श लेने आए हैं।
तीन शिक्षिकाएं मिली संक्रमित, शुरू होने से पहले हुआ बंद
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में स्टाफ के कोरोना टेस्ट किए। जांच में तीन शिक्षिकाएं कोरोना संक्रमित मिली है। स्कूल सोमवार को खुलने से पहले ही बंद हो गया। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बिना कोरोना जांच के लिए शिक्षकों ने विद्यार्थियों की क्लास ली।
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दो शिफ्ट में चलाया स्कूल
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में स्कूल दो चरणों में चलाया गया। सुबह के चरण में कक्षा बारहवीं के आर्ट्स के ग्रुप एक और बी को बुलाया गया। शाम की शिफ्ट में ग्रुप सी और डी को बुलाया गया। अब मंगलवार को कक्षा बारहवीं के साइंस विषय और दसवीं के विद्यार्थियों को बुलाया गया है।
ये विद्यार्थी पहुंचे परामर्श लेने
खंड विद्यार्थी
फतेहाबाद 344
टोहाना 288
रतिया 210
भूना 275
भट्टू 211
जाखल 244
ये बोले विद्यार्थी : परामर्श के लिए विद्यार्थियों को स्कूल आने की अनुमति देने का फैसला सही है। हम घर पर आनलाइन तो पड़ रहे थे लेकिन गणित जैसे विषय को समझने में दिक्कत आ रही थी। पहले दिन स्कूल आकर शिक्षकों से गणित के कुछ सवाल समझे हैं। मेरी राय ये ही है कि आने वाले समय में सख्त नियमों के साथ स्कूल पूर्ण रूप से खोल देने चाहिए। - अनुराधा, छात्रा दसवीं, शांति निकेतन पब्लिक सेकेंडरी स्कूल ढिंगसरा
बारहवीं कक्षा बोर्ड की होने के कारण मुझे पढ़ाई को लेकर चिंता हो रही थी। आनलाइन हम हर विषय को पढ़ रहे हैं लेकिन कुछ डाउट दूर नहीं हो रहे थे। स्कूल में आकर शिक्षकों से परामर्श लिया और उसे समझा है। हमारी भी नैतिक जिम्मेदारी है कि कोरोना महामारी के चलते नियमों का पालन करें। - छात्रा रीतू, कक्षा बारहवीं।
सरकारी स्कूल में होने के बावजूद हमें आनलाइन अच्छे तरीके से पढ़ाया जा रहा है लेकिन हम चाहते हुए भी कुछ सवालों को समझने के लिए शिक्षकों से नहीं मिल पा रहे थे। परामर्श के लिए सोमवार को स्कूल में आकर बहुत कुछ समझा है। - छात्र विकास, कक्षा बारहवीं, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय।
पहले दिन विद्यार्थियों की संख्या कम रही है। करीब पांच फीसदी छात्र ही परामर्श लेने पहुंचे है। जहां शिक्षकों ने कोरोना टेस्ट नहीं करवाएं है उन्हें विद्यार्थियों के संपर्क में आने से मना किया गया है। धीरे-धीरे कोरोना टेस्ट करवाए जा रहे हैं। - दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी।
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