टोहाना। अंबेडकर चौक स्थित सार्वजनिक भूमि को अवैध रूप से हड़पने के प्रयास के गंभीर मामले में नगर परिषद एमई की शिकायत पर थाना शहर टोहाना पुलिस ने छह व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह भूमि लंबे समय से पुराने बस अड्डे एवं पब्लिक शौचालय के रूप में उपयोग की जाती रही है, जिसे कुछ व्यक्तियों द्वारा फर्जी दस्तावेजों के सहारे निजी संपत्ति बताने की कोशिश की जा रही थी।
नगर परिषद के एमई पंकज ढाण्डा द्वारा दी शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपी अमरजीत, उसकी पत्नी रजनी, बेटे पारुल व राहुल, जमालपुर निवासी रणबीर, नरवाना के प्रेमनगर निवासी रामनारायण तथा सुनील खोबड़ा ने गलत तथ्यों के आधार पर प्रॉपर्टी आईडी बनवाने, फर्जी सीमाएं दर्शाने तथा ऑनलाइन सिस्टम का दुरुपयोग करते हुए सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करने की साजिश रची। शिकायत पर थाना शहर पुलिस ने उपरोक्त सभी आरोपियों पर बीएनएस की धारा 318(4), 336(3), 338, 340 और 61 के तहत संगीन धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे
उपमंडल अधिकारी टोहाना द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हुए, जिनसे शिकायत के आरोपों को मजबूती मिली है। वसीका नंबर 2262 (दिनांक 13.09.2024) और वसीका नंबर 2802 (दिनांक 25.10.2024) में जिन प्रॉपर्टी आईडी व स्थानों का उल्लेख है, उनकी वास्तविक स्थिति मौके से मेल नहीं खाती। विक्रेता और खरीददार पक्ष ने अलग-अलग स्थानों की प्रॉपर्टी को अम्बेडकर चौक की भूमि से जोड़कर प्रस्तुत करने का प्रयास किया। यूएलबी पोर्टल पर एक ही स्थान के लिए कई प्रॉपर्टी आईडी दर्ज मिलीं, जिनमें से एक में मालिकाना हक ‘बस स्टैंड’ दर्शाया गया है। यह तथ्य स्वयं में सार्वजनिक भूमि होने की पुष्टि करता है। प्रस्तुत दस्तावेजों और मौके की स्थिति में गंभीर विरोधाभास पाए गए, जो साजिश के संकेत देते हैं।इस पर नगर परिषद की ओर से स्पष्ट किया गया कि आरोपित व्यक्तियों ने जानबूझकर तथ्य छिपाते हुए और फर्जी विवरण प्रस्तुत कर सार्वजनिक भूमि को निजी संपत्ति के रूप में दर्शाने का प्रयास किया, जो कानूनन गंभीर अपराध है और इससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने की आशंका थी।
नगर परिषद की शिकायत और एसडीएम जांच रिपोर्ट के आधार पर शहर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। शहर की जनता ने मांग करते हुए कहा कि गलत कागजात पर प्रॉपर्टी आईडी बनाने में शामिल सरकारी अधिकारियों की जांच के बाद उन पर भी केस दर्ज होना चाहिए।