फतेहाबाद। नशे के दलदल में फंसे युवाओं को निकालने और लत छुड़वाने के लिए वर्ष 2018 में जिला मुख्यालय में नशा मुक्ति केंद्र की शुरुआत हुई थी। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए समाज कल्याण विभाग ने वर्ष 2019 के अगस्त में इसे 10 से 30 बेड कर दिया था लेकिन कोरोना महामारी ने अतिरिक्त बेडों की संख्या की मंजूरी पर ब्रेक लगा दिया। यहां बेड़ों की संख्या अब तक नहीं बढ़ पाई है। हालांकि नशा मुक्ति केंद्र में जरूरत को देखते हुए पांच बेड अतिरिक्त लगाए गए हैं।
28 दिन के लिए किया जाता है दाखिल :
नशा मुक्ति केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ.गिरीश ने बताया कि ओपीडी में जांच के दौरान अगर किसी मरीज को दाखिल करने की जरूरत पड़ती है तो उसे 28 दिन के लिए कहकर एडमिट किया जाता है। मरीज को दवाइयां दी जाती है और समय-समय जांच के आधार पर डोज को कम ज्यादा भी किया जाता है। करीब 30 मरीज ऐसे हैं जो पूरा इलाज नहीं ले रहे हैं और छोड़कर जा रहे हैं। ऐसे लोगों के दोबारा नशे के जाल में फंसने की आशंका रहती है।
नशा मुक्ति केंद्र की ओपीडी और दाखिल मरीजों की स्थिति
वर्ष ओपीडी दाखिल हुए मरीज
जनवरी 2023 282 21
फरवरी 237 24
मार्च 236 15
अप्रैल 180 12
मई 187 36
जून 189 19
जुलाई 190 21
अगस्त 261 27
सितंबर 140 20
अक्टूबर 162 20
नवंबर 205 19
दिसंबर 183 17
जनवरी 2024 160 14
फरवरी 186 19
मार्च 153 17
अप्रैल 232 20
नशे के इंजेक्शन लगाने से गल रहे पैर और हाथ
नशा मुक्ति केंद्र में उपचार के लिए मरीजों में 10 से 15 दिनों के बीच ऐसे केस सामने आ रहे हैं जिनके पैर और हाथ गल रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक गलत तरीके से इंजेक्शन लगाते हैं और इससे नसें बंद हो जाती हैं। खून का दौरा न होने से संबंधित जगह पर जख्म होने शुरू हो जाते हैं।
दोस्तों ने पहले खुद दिया नशा, अब नशे के लिए चुराने लगा सामान
शहर के एक कॉलोनी निवासी 22 साल के युवक को उसके पिता जब नशा मुक्ति केंद्र में लेकर आए तो बताया कि कॉलेज में पढ़ने के लिए जाता था और छुट्टी के बाद दोस्तों के साथ रहने लगा। दोस्तों ने पहले अपने पैसों से नशा दिया। जब बेटे को लत पड़ गई तो घर का सामान चुराकर नशे की पूर्ति करने लगा।
उपचार के साथ नियमित व्यायाम से फिर जिंदगी शुरू की
शहर से 8 किलोमीटर दूर एक गांव निवासी 30 वर्षीय युवक ने नशा मुक्ति केंद्र में पूरा उपचार लेकर और साथ-साथ व्यायाम करके नशे को पूरी तरह से छोड़ दिया है। युवक ने बताया कि वह चूरापोस्त, हेरोइन लेता था और इसके चलते उस पर कर्जा भी हो गया। परिवार ने नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल करवाया। यहां पर पूरा उपचार लिया और व्यायाम की कक्षाएं लगाई। जिससे नशे पर काबू कर लिया और अब स्थिति ये है कि उसे तलब नहीं होती है।
नशा मुक्ति केंद्र में मरीजों को सभी सुविधाएं और दवाइयां निशुल्क उपलब्ध करवाई जा रही हैं। फतेहाबाद का केंद्र ऐसा है जहां पर गर्मियों में वातानूकुलित सुविधा दी जाती है। नाबालिग और महिलाओं के लिए अलग-अलग वार्ड हैं। विभाग की तरफ से कुछ दिन अतिरिक्त बेड की मंजूरी मिली थी और इसके बाद कोराना महामारी आने के चलते बंद करने पड़े थे। अब रतिया और टोहाना में केंद्र शुरू हो चुके हैं। फतेहाबाद नशा मुक्ति केंद्र में 10 की मंजूरी है लेकिन अतिरिक्त की व्यवस्था की गई है ताकि किसी को वापस न लौटना पड़े।
- डॉ.गिरीश, मनोचिकित्सक एवं नोडल अधिकारी, नशा मुक्ति केंद्र