जिले से गुजर रही घग्गर नदी में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार की तुलना में बुधवार को घग्गर के जलस्तर में एकाएक वृद्धि हुई। इसके चलते घग्गर के तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वालों लोगों में एक बार फिर बाढ़ की आशंका पैदा हो गई है। बुधवार को गुहला-चीका में घग्गर नदी का जलस्तर 9240 क्यूसेक था। खनौरी में ये जलस्तर में 1425 और चांदपुरा साइफन पर 700 क्यूसेक दर्ज किया गया। जबकि मंगलवार को यहां पानी कम था। सिंचाई विभाग के सूत्रों के अनुसार चादंपुरा साइफन पर घग्गर नदी में वीरवार सुबह तक पानी में बढ़ोतरी होने की आशंका है। शिवालिक की पहाड़ियों में बरसात होने से पानी कालका से घग्गर नदी में गिरता है। ये नदी पंजाब के पटियाला, गुहला-चीका, कैथन, खनौरी से होते हुए फतेहाबाद जिले में प्रवेश करती है। यहां से टोहाना, जाखल और चांदपुरा से होते हुए घग्गर नदी सिरसा की ओर निकल जाती है। आम दिनों में यहां पानी नहीं होता, लेकिन पहाड़ों में बरसात का पानी यहां पर असर डालता है। जब-जब भी पहाड़ों में तेज बरसात हुई तो क्षेत्र में बह रही घग्गर नदी के तटबंद टूटे और यहां बाढ़ आई।
बढ़ गया पानी
सिंचाई विभाग के अनुसार मंगलवार को गुहला-चीका में 7700 क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया, जबकि खनौरी में 800 क्यूसेक एवं चांदपुरा में 700 क्यूसेक पानी का बहाव था। बुधवार सुबह ये बढ़कर गुहला-चीका में 9240, खनौरी में 1425 एवं चांदपुरा में 770 तक पहुंच गया। चांदपुरा में वीरवार तक पानी का स्तर और बढ़ने की आशंका है, क्योंकि खनौरी और गुहला-चीका का पानी यहां पहुंचने में तकरीबन 15-20 घंटे का समय लगता है। हालांकि बाढ़ की संभावना को लेकर जिला प्रशासन ने 105 गांवों को चिह्नित करते हुए कंट्रोल रूम भी स्थापित कर रखा है। मालूम हो कि यहां 1962, 1976, 1983, 1988, 1993, 1995, 1998 और 2010 में बाढ़ अपनी विनाश लीला पहले दिखा चुकी है। ये बाढ़ अगस्त और सितंबर माह के दौरान ही कहर बरपाती है।
बाढ़ का खतरा नहीं
सभी ड्रेनों की सफाई करवा दी गई है। 20 हजार खाली कट्टों का इंतजाम है। खनौरी और चांदपुरा में वायरलेस स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जहां पर दिन-रात एक कर्मचारी की ड्यूटी है। हालांकि यहां फिलहाल बाढ़ का खतरा नहीं है।
धूप सिंह, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग, फतेहाबाद ।