फतेहाबाद। कुपोषण के मामले में फतेहाबाद प्रदेश के सभी जिलों में 15वें स्थान पर है। जिले में पांच वर्ष से कम आयु के 24 फीसदी बच्चे उम्र से कम हाइट के हैं जबकि 16 प्रतिशत बच्चों में वजन व ऊंचाई का अनुपात कम है। इसी तरह से पांच वर्ष से कम उम्र के 62 प्रतिशत बच्चे एनीमिया के शिकार हैं। 15 से 49 वर्ष के आयु वर्ग की 59 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में खून की कमी पाई गई हैं। 66 प्रतिशत किशोरियों में खून की कमी है।
यह चिंतनीय आंकड़े मंगलवार को डीसी सहित प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष हरियाणा स्वर्ण जयंती वित्तीय प्रबंधन संस्थान की राज्य कार्यक्रम अधिकारी ने एकदिवसीय कार्यशाला में रखे। कार्यशाला में बताया गया कि हरियाणा स्वर्ण जयंती संस्थान की वित्तीय प्रबंधन की इकाई द्वारा प्रदेश में कुपोषण व एनीमिया को दूर करने के लिए एकीकृत नीति बनाई गई है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए इसकी एक टीम जिला में आई हुई है।
संस्थान की राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. नीरू ने बताया कि संस्थान द्वारा विभिन्न जिलों में जो सर्वे किया गया है, उससे यह नतीजे सामने आए है कि सभी विभाग अपने कार्यक्रमों को अपने स्तर पर अलग-अलग चला रहे हैं जबकि इनका उद्देश्य एक ही है। यदि एक उद्देश्य को लेकर सभी संस्थानों की कार्य प्रणाली को एकीकृत किया जाता है तो लक्ष्य आसानी से पूरे किए जा सकते हैं। फतेहाबाद जिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी पीछे है। इसे बेहतर बनाने के लिए सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करना होगा।
कार्यशाला में सीटीएम सुरेश कुमार, सिविल सर्जन डॉ. सपना गहलावत, डीडीपीओ बलजीत चहल, डीईओ दयानंद सिहाग, महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी कविता रानी, हरियाणा स्वर्ण जयंती वित्तीय प्रबंधन संस्थान के संयुक्त निदेशक मनोज गोयल, रिसर्च सहायक नम्रता शर्मा, शिवांगी गर्ग सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
पांचवें स्थान तक पहुंचना लक्ष्य
उपायुक्त मनदीप कौर ने कहा कि हमारा लक्ष्य जिले को 15वें के बजाय प्रदेश में कम से कम पांचवें स्थान पर लाने का है। इसके लिए सभी विभागों को एक साथ मिलकर कार्य करना होगा। कुपोषण वैश्विक स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जिसके अंतर्गत अंडर न्यूट्रिशन, ओवर वेट, मोटापा व पोषण संबंधित विभिन्न बीमारियां सम्मिलित हैं। लोगों में लौह तत्व की कमी से होने वाले एनीमिया की बीमारी आम हो गई है। कुपोषण व खून की कमी की समस्या को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, विकास एवं पंचायत विभागों के माध्यम से अलग-अलग योजनाएं चलाई जा रही हैं। सभी विभाग आपसी तालमेल के साथ कार्य करें और महिलाओं व बच्चों में होने वाले खून की कमी व कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए एकीकृत रूप में कार्य करें।