पहले छेड़ेंगे नहीं लेकिन बाद में छोड़ेंगे नहीं। ये चेतावनी अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने गांव ढाणी गोपाल चौपटा पर आयोजित धरने के 15वें दिन बतौर मुख्यातिथि संबोधित करते हुए दी। मलिक को भूना से ढाणी गोपाल तक मोटर साइकिलों के जत्थे के साथ ले जाया गया। दर्जनों बाइक सवारों ने शहर में जाट एकता जिंदाबाद के नारे लगाए। युवकों ने खट्टर सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। मलिक ने कहा कि 19 फरवरी को जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान शहीद हुए लोगों का बलिदान दिवस प्रदेश के विभिन्न धरनास्थलों पर मनाया जाएगा और शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि और पुष्प अर्पित किए जाएंगे। सरकार जाटों के साथ लगातार वादाखिलाफी रही है। जाट समाज अपनी ताकत सरकार को दो बार दिखा चुका है, पर सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है।
एसपी पर बरसे बल्हारा
राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक के सहयोगी अशोक बल्हारा ने एसपी पर जमकर भड़ास निकालते कहा कि यदि पुलिस को नोटिस देना है तो अब देकर दिखाए। इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। बल्हारा ने कहा कि जाट समाज के लोग जब तक चुप रहते हैं तो कुछ नहीं करते, लेकिन उन्हें परेशान किया जाता है तो वे मुंहतोड़ जवाब देते हैं। इसीलिए पुलिस ने नोटिस देने का काम बंद कर दिया है। अगर ऐसा नहीं करते तो एसपी साहब को करारा जवाब मिलना तय था।
मलिक के आने पर प्रशासन हुआ सतर्क
यशपाल मलिक के आने का समाचार मिलते ही जिला पुलिस उपकप्तान गंगाराम पूनिया, एसडीएम सतबीर सिंह जांगू, नायब तहसीलदार होशियार सिंह जांगड़ा, डीपीआरओ सुरेंद्र सिंह भारी पुलिस बल सहित मौके पर पहुंचे थे। धरनास्थल पर आने-जाने वाले लोगों की गुप्त रूप से वीडियोग्राफी भी की जा रही थी। शांति व्यवस्था पूरी तरह से कायम थी और एहतियात के तौर पर धरने पर मौजूद महिलाओं की संख्या को देखते दर्जनों महिला पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी।
भीड़ को देखकर गदगद हुए ढाका
धरने पर पहली बार प्रदर्शनकारियों की भीड़ देखकर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष सूबे सिंह ढाका गदगद हो उठे। क्योंकि प्रदर्शन में आज पहली बार सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे थे। दर्जनों मोटर साइकिलों के साथ भारी संख्या में युवा भी शामिल हुए। बता दें कि पुलिस द्वारा नोटिस थमाए जाने की कार्रवाई के दौरान लोग भयभीत थे और धरने पर नहीं पहुंच रहे थे। पुलिस ने जैसे ही पिछले 5 दिनों से नोटिस देने की कार्रवाई बंद करने के बाद प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ रही है।