गांव हसंगा में करोड़ों रुपये की पांच एकड़ पंचायती भूमि पर 29 दिसंबर को 18 परिवारों से कब्जा खाली कराया जाएगा। इसको लेकर प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी रवींद्र दलाल ने इसकी पुष्टि की है। बीडीपीओ ने बताया कि हसंगा की पंचायती जमीन पर कई वर्षों से कब्जा करके बैठे 18 परिवारों को वीरवार को बेदखली नोटिस दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि पंचायत ने जमीन खाली करवाने को लेकर एसडीएम रतिया और तहसीलदार के न्यायालय में केस दायर किया था।
इस पर कब्जेदारों ने जमीन से संबंधित कोई भी दस्तावेज पेश नहीं किए। इसलिए तत्कालीन पंचायत के पक्ष में एसडीएम की कोर्ट ने फैसला देकर जमीन खाली कराने के आदेश दिए थे। हालांकि मामला बीच में ही अटका हुआ था। इसलिए वर्तमान पंचायत ने पैरवी करके जमीन पंचायत को दिलाने के लिए कार्रवाई की। जिसको लेकर प्रशासनिक स्तर पर कब्जेदारों को कई नोटिस दिए गए। कब्जेदारों ने पंचायत की जमीन को स्वयं खाली नहीं किया। इसलिए 22 दिसंबर को बेदखली नोटिस दिया गया है। अगर सात दिन के अंदर स्वयं जमीन खाली करते हैं तो ठीक वरना 29 दिसंबर को कब्जा कार्रवाई खाली करवाने को लेकर अंजाम दिया जाएगा।
50 से अधिक पुलिस कर्मी सहायता के लिए मांगें
खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी रवींद्र दलाल ने बताया कि जमीन खाली करवाने को लेकर पुलिस सहायता मांगी गई है। उन्होंने विरोध को देखते हुए 50 से अधिक महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मियों के लिए लिखित पत्र एसएचओ भूना को दिया गया है।
वहीं दो जेसीबी मशीन, दर्जनों ट्रैक्टर-ट्राली व मजदूरों का भी प्रबंध किया गया है। उधर, हसंगा में कब्जेदारों को नोटिस देने के बाद खलबली मच गई है। क्योंकि उपरोक्त 18 परिवार कई वर्षों से पंचायत की जमीन पर कब्जा करके अपना आशियाना बनाए हुए हैं। 29 दिसंबर को उनका घर कैसे उजड़ने से बचे इसको लेकर भी राजनीतिक लोगों के दरवाजों को खटखटाने के लिए रणनीति बनाई जा रही है। करोड़ों रुपये की जमीन खाली होगी या पूर्व की भांति ही परिणाम शून्य होगा। यह अभी भविष्य के गर्भ में है। इस संबंध में हसंगा के सरपंच सुरेंद्र लांबा ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों के आदेशों की पालना की जाएगी।
क्या है मामला
ग्राम पंचायत हसंगा की जोहड़ के पास 5 एकड़ से अधिक पंचायती जमीन पर 18 व्यक्तियों ने करीब 18-20 साल पहले मकान बनाकर कब्जा कर लिया था। जो अब एक कालोनी का रूप धारण कर चुकी है। जिसमें अनुसूचित जाति व पिछड़ा वर्ग के लोग ही घरों में अपने परिवारों का पालन -पोषण कर रहे हैं।
पूर्व सरपंच एवं नंबरदार देवीलाल जोगेल ने कब्जा खाली करने को लेकर पहला कदम उठाया था। पंचायत जीत भी गई मगर 15 साल हो चुके हैं कब्जेदार ज्यों के त्यों मौके पर बसे हुए हैं। ग्राम पंचायत ने पुन: कब्जा खाली करवाने को लेकर प्रयास किए हैं।