सुरेंद्र असीजा। धान के सीजन में इस बार धान की खरीद को लेकर व्यापारियों, प्रशासन और किसानों को परेशानी हो सकती है। सरकार ने फतेहाबाद में जाखल, रतिया, टोहाना और फतेहाबाद मंडियों में ऑनलाइन खरीद का फैसला लिया है। इसके लिए आढ़तियों और किसानों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। वहीं आढ़तियों में धान के ऑनलाइन खरीद के फैसले से असमंजस की स्थिति है। सीजन में एकदम से आने वाले धान को लेकर मार्केट कमेटी प्रशासन भी समझ नहीं पा रहा कि मंडी में आखिरकार व्यवस्था कैसे की जाए।
शुक्रवार को मार्केट कमेटी कार्यालय में व्यापार मंडल की बैठक बुलाई गई। व्यापार मंडल ने मार्केट कमेटी सचिव व खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कह दिया कि वे ऑनलाइन खरीद नहीं कर सकते। आढ़तियों ने यहां तक चेतावनी दे दी कि वो माल ही नहीं खरीदेंगे और हड़ताल पर चले जाएंगे। आढ़तियों की एक ही चिंता थी कि ऑनलाइन खरीद से धान का पैसा किसानों के पास सीधा चला जाएगा और व्यापारियों ने किसानों को जो अग्रिम दे रखा है, उसका क्या होगा। अनाजमंडी व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष रवि मेहता ने कहा कि आढ़तियों ने मार्केट कमेटी प्रशासन को सीधा कहा है कि ऑनलाइन काम नहीं करेंगे। इसके लिए चाहे हड़ताल करनी पड़े या काम बंद करना पड़े। ये आढ़तियों को समाप्त करने का प्रयास है।
ये की जा रही है व्यवस्था
1. किसान अपनी मंडी में ट्राली लेकर आएगा। जहां गेट पर ही उसे टोकन दिया जाएगा। इस टोकन के आधार पर ही उसे एंट्री मिलेगी। इसके बाद गेट से ही धान का सैंपल लेकर मार्केट कमेटी कार्यालय ले जाया जाएगा। जहां टोकन के अनुसार उस सैंपल की टेस्टिंग होकर उसका अनुमानित रेट निर्धारित होगा। इसके लिए किसानों और आढ़तियों का रजिस्ट्रेशन करवाया जा रहा है।
ये हैं आढ़तियों के सवाल
1. सबसे पहले सीजन में ये संभव नहीं है कि जब लाखों क्विंटल धान की आवक होती है, तो उसे गेट पर ही रोक कर टोकन दिया जाए। मंडी के बाहर भयंकर जाम की स्थिति बन जाएगी।
2. प्रशासन के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जो लैब में जांच कर चावल की गुणवत्ता या उसकी कीमत बता सके। जबकि व्यापारी धान को देखकर ही उसकी कीमत का अंदाजा लगा लेते हैं।
3. आढ़तियों की मानें तो ऑनलाइन खरीद के बाद किसानों को खरीद एजेंसी उसके खाते में डालेगी। जबकि आढ़तियों को ये बताया जा रहा हे कि पेमेंट उनके माध्यम से होगी। आढ़तियों को चिंता है कि किसानों ने आढ़तियों से एडवांस में पैसा ले रखा है। उसकी वापसी की क्या गारंटी है? आढ़तियों का ये भी कहना है कि जब किसान केे पास ही पैसा चला जाएगा तो वो आढ़ती की ओर रुख भी नहीं करेगा। ऐसे में उनकी दुकानदारी ठप हो सकती है और उनका पैसा डूबने की आशंका है।
4. सीजन में लाखों क्विंटल धान की आवक होती है। इसके लिए महज सात-आठ कंप्यूटर से कैसे काम हो पाएगा। खरीददारी के बाद उठान की व्यवस्था क्या होगी। इससे सभी मंडियां जाम हो जाएंगी।
5. आढ़तियों का कहना है कि किसान अनपढ़ है और अधिकांश आढ़ती भी कंप्यूटर नहीं जानते, ऐसे में ऑनलाइन खरीद में सभी किसानों की एंट्री कैसे होगी।
6. धान की वेरायटी खराब होने, काला होने अथवा नमी होने पर आढ़ती या खरीद एजेंसी उसे किसान को वापस दे देती है ताकि माल को सुधार कर वापस लाए। ऑनलाइन होने के बाद किसान अपना माल वापस ले जाता है तो उसका क्या होगा।
सरकार के इस फैसले के क्रियान्यवन में काफी दिक्कतें आएंगी। इसके लिए मार्केट कमेटी सचिव व खाद्य आपूर्ति विभाग के नियंत्रक को अवगत करा दिया गया है। मीटिंग में हमने इस बात का विरोध किया कि हम ऑनलाइन काम नहीं कर सकते। मंडी के व्यापारी कुरुक्षेत्र और लाडवा आदि के संपर्क में हैं, जहां व्यापारी ऑनलाइन खरीद का विरोध कर रहे हैं।
प्रेम मित्तल, प्रधान अनाजमंडी व्यापार मंडल, फतेहाबाद।
सबको ध्यान में रखकर बनी है नीति
आढ़तियों, किसानों और खरीद कार्य से जुड़े प्रत्येक काम को ध्यान में रखकर नीति बनी है। ऑनलाइन के लिए आढ़तियों और किसानों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। किसानों का पैसा किसानों के खाते में और आढ़तियों का पैसा आढ़तियों के खाते में जाएगा। सभी को आधार कार्ड से लिंक किया जा रहा है। प्रयास किया जाएगा कि किसी किसान या आढ़ती को परेशानी न हो।
दिलावर सिंह, सचिव, मार्केट कमेटी ।