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पारे के आगे टमाटर का रंग हुआ फीका

Tue, 26 Apr 2016 11:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला फतेहाबाद
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मंडी में टमाटर दिखाता किसान। - फोटो : bureau
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पिछले दिनों में तापमान में एकाएक हुई बढ़ोतरी का सीधा असर सब्जियों पर पड़ा है। सबसे ज्यादा असर टमाटर पर हुआ है। समय से पहले टमाटर पक जाने से मंडी में टमाटर की आवक तेज हो गई है जिसके परिणामस्वरूप 15 रुपये प्रति किलो बिकने वाला टमाटर दो रुपये प्रति किलो बिक रहा है। सब्जी उत्पादक किसानों को उसकी फसल का लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा। इसके अलावा बैंगन, पेठा व घिया की फसल पर भी गर्मी की मार पड़ी है।
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मंगलवार को यहां टमाटर की फसल तीन रुपये प्रति किलो बिकी। जिसमें किसान का यहां लाने क ा खर्च, लागत, व खुद की मजदूरी भी शामिल है। फसल उत्पादक किसानों की मानें तो उन्हें यहां फसल लाने में दो रुपये प्रति किलो खर्च पड़ता है। ऐसे में प्रति एकड़ 20 हजार से ज्यादा का नुकसान हो रहा है।

मंगलवार को सब्जी मंडी में टमाटर की फसल लेकर आए एमपी रोही निवासी कृष्ण कुमार ने बताया कि वे कई सालों से टमाटर का उत्पादन कर रहा है। अब दो दिन पूर्व टमाटर दो रुपये किलो, व मंगलवार को तीन रुपये प्रति किलो बेचने पड़े हैं। वजह है टमाटर की काफी ज्यादा आवक होना। जिसके कारण खरीददार इससे ज्यादा भाव नहीं दे रहे। इस भाव में गांव से सब्जी मंडी तक का परिवहन खर्च, मजदूरी व लागत भी शामिल है।
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कृष्ण कुमार ने बताया कि अब तक उसे प्रति एकड़ 20 हजार से अधिक का नुकसान हो चुका है। मंडी के व्यापारी सुरेश मताना व अशोक मेहता ने बताया कि पिछले कई दिनों से टमाटर की काफी आवक हो रही है। खरीददार हैं नहीं, जिसके कारण किसानों को दो रुपये प्रति किलो टमाटर बेचकर ही सब्र करना पड़ रहा है।
 इस बार जिले में 380 हेक्टेयर भूमि पर टमाटर की बिजाई की गई थी। आमतौर पर अप्रैल में आया टमाटर 15 मई तक बाजार में आता है लेकिन इस बार तापमान में समय से पूर्व बढ़ोतरी हो गई जिस कारण टमाटर की पूरी फसल समय से पहले तैयार हो गई। तैयार होने के कारण किसानों को मजबूरन फसल मंडी में जल्दी लेकर आना पड़ा।
जिला बागवानी अधिकारी श्रवण कुमार के अनुसार तापमान में बढ़ोतरी के कारण छोटा बड़ा साइज का टमाटर पक कर तैयार हो गया है। जिस कारण किसानों को मंडी में लेकर आना पड़ा। मौसम ठीक रहता तो टमाटर की आवक धीरे-धीरे होती और अच्छे रेट मिलते। अब अप्रैल माह में ही टमाटर की फसल खत्म हो जाएगी जबकि पूर्व में 15 मई तक टमाटर की लोकल आवक होती थी। इसके अलावा बेलदार सब्जियों में भी फल सहन करने की क्षमता नहीं रही। कुछ ही दिनों में अन्य बेलदार फसलों पर भी फल लगना बंद हो जाएगा।
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