जिले में इस बार बंपर आवक की उम्मीद है लेकिन मंडी में उठान में ढिलाई को देख कर ऐसा लग रहा है मानो जिला प्रशासन इसके लिए तैयार ही नहीं था। मंडी में लगातार बढ़ती आवक के सामने जिला प्रशासन ने तो जैसे सरेंडर ही कर दिया है। उठान और लदान का काम इतना धीमा है कि अब तो मंडी में गेहूं लेकर किसान भी इससे परेशान होने लगे हैं। दरअसल मंडी में लदान के बाद ही किसान को गेहूं की पेमेंट की जाती है जिसके चलते धीमे लदान और उठान का खामियाजा किसानों और आढ़तियों को भुगतना पड़ रहा है।
अब तक 5 लाख क्विंटल गेहूं की हो चुकी है आवक
मार्केट कमेटी से मिली जानकारी के अनुसार अब तक स्थानीय अनाज मंडी में ही पांच लाख क्विंटल गेहूं आने की संभावना है। लेकिन अगर उठान की बात की जाए तो अधिकारी अभी तक आधे गेहूं का उठान ही नहीं करा पाए हैं। मार्केट कमेटी के आंकड़ों के मुताबिक अब तक महज 1 लाख 57 हजार क्विंटल गेहूं का ही उठान हो पाया है। ऐसे में अनाज मंडी और बाहर उसके आसपास की सड़कों पर अब गेहूं की बोरियां ही दिख रही हैं। इसके चलते किसान भी परेशान हैं और आढ़ती भी।
खुले में पड़ा है हजारों क्विंटल गेहूं, बारिश हुई तो तबाह हो जाएंगे किसान
अनाज मंडी में धीमे उठान के चलते मंडी के शेड के नीचे जगह खाली ही नहीं हो पा रही। इसके चलते खुले में हजारों क्विंटल गेहूं पड़ा हुआ है। अब मंडी में जगह की कमी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मंडी में शेड के बाहर लगभग 50 हजार बोरियां पड़ी हैं और लगभग पांच हजार से अधिक बोरियां मंडी से बाहर सड़कों पर पड़ी हैं। इसके अलावा गेहूं की ढेरियां भी खुले में पड़ी हैं। ऐसे में अगर खुदा ना खास्ता बरसात हो गई तो किसानों की जान पर आफत आ जाएगी। उनके पास बरसात से सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध तक नहीं हैं।