पानीपत में फाने में लगाई आग में मां बेटे के जिंदा जलने के बाद भले ही प्रदेश सरकार पराली और गेहूं के फाने जलाने के मामले में सख्ती दिखाने का दावा कर रही हो लेकिन फतेहाबाद जिले का नाकारा प्रशासन इस दिशा में आंखें तक नहीं तरेर रहा। हालात ये हैं कि गेहूं की फसल कटने के बाद लगभग पूरे जिले में गेहूं के फाने और पराली जलाई जा रही है, लेकिन एक भी किसान के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया गया है।
और तो और जिले के अफसर अपने एसी दफ्तर छोड़ खेतों का दौरा तक करने नहीं गए हैं जिससे पता चल सके कि आखिर समस्या कितनी गंभीर है। अब प्रशासन के नकारापन का अंदाजा इसी बात से लगाइए कि उपायुक्त निवास के पीछे ही भूना मोड़ पर रविवार दिन-दहाड़े खेतों में गेहूं के फानों को आग लगा दी गई। आग की लपटों के कारण इतना धुआं सड़क पर फैल गया कि राहगीरों का सांस तक लेना दूभर हो गया लेकिन क्या मजाल जो साहब के कानों पर जूं तक रेंगी हो।
हुडा चौकी के सामने वाले खेत में रविवार को लगाई गई आग
भूना रोड पर शहर की सीमा के अंदर ही खेतों में आग लगाने का सिलसिला जारी है। किसानों का हौसला इतना बढ़ चुका है कि अब तो अफसरों को मुंह चिढ़ाकर खेतों में आग लगाई जा रही है। भूना रोड पर हुडा चौकी के सामने वाले खेतों में रविवार को दिन में आग लगा दी गई। इस दौरान कई अफसरों की गाड़ियां भी यहां से निकली लेकिन किसी अफसर का ये मन नहीं किया कि एक मिनट के लिए गाड़ी रोककर खेतों में आग लगाने से किसानों को रोका जाए। दो दिन पहले भूना रोड पर धरना दे रहे किसानों को समझाने के लिए खुद एसडीएम गए थे लेकिन उन्होंने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
ये होता है नुकसान
1. जमीन में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है।
2. आम लगाने से खेत की जमीन सख्त होती है, जिससे बंजर होने का खतरा भी बढ़ता है।
3. गेहूं के फाने जलाने पर मीथेन गैस निकलने से जमीन की जलधारण क्षमता पर प्रतिकूल असर
4. गेहूूं के फाने एवं पराली जलाने पर पर्यावरण को नुकसान
गेहूं की पराली और फाने इस तरह किए जा सकते हैं इस्तेमाल
1. गेहूं के फाने एवं पराली को जलाने की बजाए तूड़ी बनाकर बेच सकते हैं।
2. पराली की मदद से जैविक खाद बनाई जा सकती है, इसे बेच भी सकते हैं और खुद भी इस्तेमाल।
3. पराली और गेहूं के फानों को ट्रैक्टर से खेतों में ही मिला दिया जाए तो भी जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी।
होती है महज बयानबाजी, नहीं होते जागरूकता कैंप
गेहूं का सीजन आते ही प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से महज बयानबाजी ही होती रही है। एक भी मामला ऐसा नहीं आया है जिसमें किसी प्रशासनिक अधिकारी ने कोई जागरूकता कैंप आयोजित कराया हो, जिसमें किसानों को गेहूं की पराली एवं फाने जलाने के नुकसान के बारे में बताया हो। इतना ही नहीं, पराली से किसानों को होने वाले लाभ के बारे में किसी को नहीं बताया जाता है।
प्रशासन के सामने खड़े हैं ये सवाल, डीसी सोलंकी बात तक करने को तैयार नहीं
1. खेतों में किसान आग लगाते जा रहे हैं, प्रशासन कुछ नहीं कर रहा।
2. डीसी निवास के पिछले साइड भूना रोड पर दिनदहाड़े खेतों में आग लगाई जा रही है।
3. किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने अभी तक किसी खेत में दौरा क्यों नहीं किया।
4. अब तक पूरे जिले से खेतों में आग की खबरें आई हैं लेकिन एफआईआर एक में भी नहीं।