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अब शहर में भगवान भी चुकाएंगे अपने-अपने मंदिरों का प्रॉपर्टी टैक्स

Tue, 14 Feb 2017 11:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहाबाद
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फतेहाबाद नगर परिषद द्वारा बाबा रामदेव मंदिर को भेजा गया प्रोपर्टी टैक्स नोटिस । - फोटो : bureau
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नगर परिषद ने अब फतेहाबाद के विभिन्न मंदिरों में विराजमान भगवानों पर प्रॉपर्टी टैक्स के नोटिस ठोंक दिए हैं। शहर के लगभग आधा दर्जन मंदिरों को नगर परिषद ने प्रॉपर्टी टैक्स भरने के नोटिस भेजे हैं। इन नोटिसों से विभिन्न मंदिरों के प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारी हैरान हैं, क्योंकि आज तक कभी मंदिरों का प्रॉपर्टी टैक्स नहीं मांगा गया था। इतना ही नहीं, नगर परिषद ने तो बाकायदा श्मशान भूमि सभा से भी प्रॉपर्टी टैक्स की डिमांड करते बिल भिजवाया है। दूसरी ओर इस मामले के मीडिया में उठने के बाद नगर परिषद ईओ ओपी सिहाग ने सफाई देते कहा कि कंपनी ने अपने सर्वे में सारे शहर की इमारतों को गिना है। उन्होंने हमें बिल बनाकर दे दिए। अब हमें देखना है कि कहां के बिल माफ करने हैं और कहां से लेने हैं। ईओ ने साफ कहा कि धार्मिक स्थानों का हाउस टैक्स सरकार अब तक माफ करती आई है। इस बार भी यही संभावना है।
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शमशान भूमि को साढ़े तीन हजार तो बाबा रामदेव मंदिर को भेजा साढे़ 12 हजार का नोटिस
शहर के आधा दर्जन मंदिरों को प्रॉपर्टी टैक्स भरने के नोटिस मिल चुके हैं। इनमें रेगर बस्ती स्थित बाबा रामदेव मंदिर, नेशनल हाइवे स्थित श्मशान भूमि, मनकामेश्वर मंदिर आदि शामिल हैं। इन मंदिरों की संचालन सभा पदाधिकारियों का कहना है कि आज तक कभी मंदिरों आदि के लिए इस प्रकार के नोटिस नहीं भेजे गए हैं। श्मशान भूमि का प्रॉपर्टी टैक्स साढ़े 3 हजार रुपये है तो रेगर बस्ती स्थित बाबा रामदेव मंदिर का प्रॉपर्टी टैक्स लगभग साढ़े 12 हजार रुपये है। दोनों को नगर परिषद ने कामर्शियल प्रॉपर्टी के तहत रखा है।

लोगों ने उठाए विरोध के स्वर
मंदिरों को प्रॉपर्टी टैक्स के नोटिस भेजे जाने पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। रेगर बस्ती के सुरेंद्र डींगवाल और पूर्व नप अध्यक्ष वीरेंद्र नारंग ने मंदिरों को प्रॉपर्टी टैक्स के नोटिस भेजे जाने की कड़ी निंदा की है। डींगवाल के अनुसार नगर परिषद और जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई यह परंपरा गलत है। वहीं पूर्व नप अध्यक्ष वीरेंद्र नारंग ने कहा कि पांच साल तक वे भी अध्यक्ष रहे हैं लेकिन कभी मंदिरों एवं धार्मिक संस्थानों को नोटिस नहीं भेजे गए। अगर ये गलती से भी आए हैं तो भी लापरवाही है क्योंकि नगर परिषद प्रशासन द्वारा सर्वे करने वाली कंपनी को पहले ही बता देना चाहिए था कि उन्हें मंदिरों, मस्जिदों और अन्य धार्मिक संस्थानों का सर्वे नहीं करना है।
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प्रॉपर्टी टैक्स का सर्वे एक निजी कंपनी ने किया था। उन्होंने पूरे शहर का सर्वे किया, जिसमें मंदिर आदि शामिल हैं। सरकार हमेशा ही धार्मिक स्थानों के प्रॉपर्टी टैक्स माफ करती आई है, इस बार भी यही संभावना है।
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-ओपी सिहाग, नगर परिषद कार्यकारी अधिकारी, फतेहाबाद ।
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