नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की आपसी खींचतान मरीजों और सरकारी अस्पताल आने वाले लोगों की जान पर बनती जा रही है। अस्पताल पोस्टमार्टम रूम के बाहर फैले कचरा साम्राज्य को लेकर ना तो स्वास्थ्य विभाग कोई कदम उठाने को तैयार है और ना ही नगर परिषद । हैरत तो इस बात को लेकर है कि नगर परिषद, स्वास्थ्य विभाग और भाजपा जिलाध्यक्ष सहित सभी लोगों ने इस कचरे को जल्द उठवाने का भरोसा दिया था लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि मानों सभी अधिकारी और नेता अपने खुद के दिए आश्वासन पर भी कायम नहीं रह पा रहे। वर्ना महज महज आधे घंटे की सफाई के काम के लिए लगभग दो माह का समय नहीं लगता।
दो माह पहले भी भाजपा जिलाध्यक्ष ने हटवाया था कचरा, अब वो भी पीछे हट रहे
दो माह पहले भाजपा जिलाध्यक्ष के पैतृक गांव फुलां के एक व्यक्ति की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। मृतक के शव का पोस्टमार्टम करवाने के लिए भाजपा जिलाध्यक्ष वेद फुलां भी सामान्य अस्पताल में पहुंचे थे। उस वक्त भी पोस्टमार्टम रूम के बाहर कचरे का ढेर लगा हुआ था। वजह उस वक्त भी स्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद के बीच अहम की लड़ाई थी। हालांकि भाजपा जिलाध्यक्ष ने नगर परिषद अध्यक्ष को फोन किया और उनके फोन करने के आधे घंटे के अंदर गाड़ी आ गई और हाथोंहाथ वहां पर सफाई करवा दी गई। लेकिन उसके बाद से फिर से यहां पर सफाई बंद है। नतीजन फिर से पोस्टमार्टम रूम के बाहर गंदगी का आलम है। कुछ दिन पहले भाजपा जिलाध्यक्ष ने भी भरोसा दिलाया था कि इस समस्या का समाधान होगा लेकिन दस दिन बीतने के बावजूद अभी तक समस्या ज्यों की त्यों है।
गेट पर लगा ताला है विवाद की असली जड़
नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग के बीच विवाद की असली जड़ पोस्टमार्टम रूम के सामने के मुख्य गेट पर लगा ताला है। पहले ये विवाद था कि अस्पताल परिसर के अंदर से नगर परिषद कर्मचारी गंदगी नहीं उठाएंगे। अगर कूड़ा बाहर मिलेगा तभी उठाया जाएगा। इसके बाद बैठकों के दौर के बाद ये तय हुआ कि पोस्टमार्टम रूम के सामने वाला गेट खोला जाएगा और नप कर्मचारी वहां से कचरा उठा लेगा, लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ताला और गेट खोलने के लिए एक कर्मचारी की ड्यूटी तक तय नहीं कर पाए हैं। इसी वजह से दिनोंदिन यहां पर कूड़े का ढेर बढ़ता जा रहा है और स्वच्छता अभियान का दंभ भरने वाला जिला प्रशासन आंखें मूंद कर बैठा है।
डंपिंग प्वाइंट की चारदीवारी भी तुड़वा दी, अब पूरे फर्श पर फैला है कचरा
पहले इसी जगह पर नगर परिषद का डंपिंग प्वाइंट था, जहां पर कूड़ा-कचरा इकट्ठा होता था। लेकिन विवाद के बाद एकाएक इस डंपिंग प्वाइंट की चारदीवारी को तुड़वा दिया गया जिसके बाद से सारा कचरा अब अस्पताल परिसर में ही फैला रहता है। हैरत की बात तो ये है कि किसी भी अधिकारी ने इसको दोबारा से बनवाने की मांग तक नहीं उठाई।
अधिकारी फिर एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
सीधी बात: ओपी सिहाग, नगर परिषद ईओ फतेहाबाद ।
प्रश्र: सामान्य अस्पताल में गंदगी को दो माह हो गए हैं। किसकी जिम्मेदारी है।
उत्तर: किसी भी इमारत के प्रांगण से गंदगी उठाना नप की जिम्मेदारी नहीं है। हां, अगर गंदगी अस्पताल के बाहर होती तो हम उठवा लेते।
प्रश्र : स्वास्थ्य विभाग आपकी जिम्मेदारी बता रहा है।
उत्तर : ऐसा नहीं है। ऐसे तो बाकी विभाग भी यही करेंगे। हमने उन्हें कहा था कि एक पक्का कूड़ेदान वहां फिक्स करवा देते हैं। गेट खोलने के लिए एक कर्मचारी की भी ड्यूटी नहीं लगी है।
प्रश्र : तो फिर क्या दो विभागों की खींचतान से आम मरीजों को भुगतना होगा।
उत्तर : स्वास्थ्य विभाग के साथ बातचीत जारी है। हमनें उन्हें कहा है कि अस्पताल के अंदर एक जगह उपलब्ध करवा दी जाए, हम वहां पर पक्की चारदीवारी बनवा देंगे और गंदगी वहां जाएगी, इसके बाद नप कर्मचारी वहां से उठाया करेंगे। उम्मीद है कि जल्द ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा।
सीधी बात : डा. ओपी दहमीवाल, एसएमओ, सिविल अस्पताल
प्रश्र: पोस्टमार्टम रूम के बाहर से कचरे का समाधान क्यों नहीं हो पा रहा ।
उत्तर: ये काम नगर परिषद का है और वे अपना काम नहीं कर रहे।
प्रश्र: नप का कहना है कि परिसर के अंदर गंदगी नहीं उठाएंगे ।
उतर: पहले बाहर ही कूड़ेदान था, नगर परिषद ही स्थानीय निवासियों के ऐतराज के बाद अंदर रखवाया था।
प्रश्र: आपसी खींचतान में मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
उत्तर: इस बात की चिंता हमें भी है। लेकिन नगर परिषद के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को समझ ही नहीं रहे।
प्रश्र: उच्चाधिकारियों को शिकायत क्यों नहीं की गई ।
उत्तर: कई पत्र लिखे हैं। नगर परिषद को भी, उच्चाधिकारियों को भी । सीएमओ साहब से लगातार इसपर चर्चा होती रहती है। उम्मीद है कि जल्द कोई सकारात्मक हल निकलेगा।