प्रदूषण और पराली जलाने से निकले धुएं ने वातावरण का जहरीला बना दिया है। इससे जहां आम लोगों के जीवन पर खतरा मंडराने लगा है वहीं यातायात व्यवस्था भी लड़खड़ाने लगी है। स्मॉग के चलते रविवार को कई ट्रेनों का टाइम टेबल गड़बड़ा गया। आलम यह रहा कि रात के समय पहुंचने वाली कई ट्रेनें सुबह पहुंची तो सुबह के समय की शाम को आईं। जिस कारण यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। स्मॉग का ज्यादातर असर लंबी दूरी की व मेल ट्रेनों पर ज्यादा देखने को मिला।
हावड़ा से चलकर श्रीगंगानगर जाने वाली उद्यान आभा तूफान मेल एक्सप्रेस रविवार को साढ़े 9 घंटे की देरी से पहुंची। रेल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रात 12 बजे पहुंचने वाली इस ट्रेन के देरी से पहुंचने का मुख्य कारण उत्तर भारत में फैला स्मॉग है।
जिसके चलते ट्रेनों की चाल में कमी आई है। स्मॉग से दिल्ली सरायरोहिल्ला से चलकर फिरोजपुर जाने वाली छिंदवाड़ा एक्सप्रेस भी अपने समय से करीब एक घंटा की देरी से पहुंची। वहीं लुधियाना से सुबह 5 बजे चलकर हिसार जाने वाली पैसेंजर गाड़ी भी करीब डेढ़ घंटा की देरी से पहुंची।
इसी प्रकार शाम को नई दिल्ली से चलकर श्रीगंगानगर जाने वाली दैनिक इंटरसिटी एक्सप्रेस शाम को अनिश्चितकालीन देरी से चलना घोषित कर दिया गया। जिस कारण अनेक यात्रियों को बठिंडा, व श्रीगंगानगर की ओर जाने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ा। यही नहीं गुवाहाटी से चलकर बीकानेर लालगढ़ जाने वाली अवध आसाम एक्सप्रेस भी दो घंटे की देरी से चलना बताया गया। रेलवे स्टेशन पर बैठे यात्रियों ने कहा कि कोहरे के कारण उन्हें भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वह रात को 12 बजे से ट्रेन के इंतजार में बैठे हैं जबकि उनकी ट्रेन सुबह साढ़े 9 बजे पहुंच रही है। वहीं शम को दैनिक इंटरसिटी एक्सप्रेस के इंतजार में बैठे यात्रियों ने रोष जताया कि गाड़ियों के समय के बारे में सही जानकारी नहीं मिल रही है। रेलवे स्टेशन पर बनी पूछताछ खिड़की बंद पड़ी है। जिस कारण उन्हें गाड़ियों के देरी से चलने बारे कोई जानकारी नहीं दे रहा है।
ट्रेनों के देरी से चलने बारे किया जा रहा सूचित
स्टेशन अधीक्षक सूरजभान शर्मा ने कहा कि ट्रेनों के देरी से चलने बारे यात्रियों को सूचित किया जा रहा है। पूछताछ खिड़की पर 1 ही कर्मचारी नियुक्त है। जिसके सप्ताह में 1 दिन रैस्ट पर जाने के कारण खिड़की बंद रहती है। विभाग को इसके बारे में अवगत कराया हुआ है। कोहरे के कारण अक्सर ट्रेनों की स्पीड में कमी की जाती है जिससे उनका देरी से चलना स्वाभाविक है।