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गोरखपुर परमाणु संयंत्र प्रभावित किसानों को राहत.....

Fri, 03 Mar 2017 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
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गांव गोरखपुर स्थित परमाणु संयंत्र का प्रवेश द्वार। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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 सर्वोच्च न्यायालय ने न्यूक्लियर पावर कार्पोेरेशन ऑफ इंडिया को गोरखपुर परमाणु संयंत्र मामले में तगड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने एनपीसीआईएल की याचिका पर सुनवाई करते हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते आदेश दिया है कि गोरखपुर परमाणु संयंत्र प्रभावित किसानों को बढ़ी हुई मुआवजा राशि आठ सप्ताह में दे दिया जाए। बड़ी बात यह है कि न्यायालय ने आठ सप्ताह का समय एनपीसीआईएल के अनुरोध पर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गोरखपुर के भू-स्वामियों को बढ़ी हुई मुआवजा राशि मिलने का रास्ता प्रशस्त हो गया है। कोर्ट के फैसले पर गोरखपुर परमाणु संयंत्र विरोधी संघर्ष समिति ने प्रसन्नता जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एनपीसीआईएल को तकरीबन 184 करोड़ का मुआवजा किसानों को देना पड़ेगा।


बढ़ाकर मुआवजा देने की मियाद 27 जनवरी को हो गई थी खत्म
करीब पांच साल पूर्व एनपीसीआईएल ने गांव गोरखपुर में परमाणु संयंत्र स्थापित करने के लिए गांव गोरखपुर, काजलहेड़ी और बड़ोपल में 1503 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। 13 जनवरी 2014 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसका शिलान्यास किया। इन गांवों के किसानों ने जमीन अधिग्रहण का लंबा विरोध किया था, लेकिन प्रशासन इनको मनाने में कामयाब रहा था।
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13 जनवरी 2014 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसका शिलान्यास किया। जमीन के मुआवजे के लिए किसानों को प्रति एकड़ लगभग 31 लाख रुपये दिये गए थे लेकिन इनमें से 6 सौ एकड़ के करीब जमीन मालिकों ने नो-लिटीगेशन का शपथ देकर चार लाख अतिरिक्त भी प्राप्त कर लिए। बाकी 800 एकड़ के 127 किसानों ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में वाद दायर कर मुआवजा बढ़ाने की गुहार लगाई। अदालत ने अपने फैसले में प्रति एकड़ 9 लाख चार हजार रुपये मुआवजा बढ़ाने के आदेश दिए। यानी कि मुआवजे की बढ़ी राशि, सरकार की नीति में सोलेटियम तथा ब्याज मिलाकर 23 लाख रुपये प्रति एकड़ भूमि स्वामियों को दिया जाना था।

फैसले के खिलाफ एनपीसीआईएल ने हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते फैसला दिया कि जिला न्यायालय के आदेश का आधा, यानी की चार लाख 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा राशि किसानों को छह सप्ताह के भीतर बिना किसी गारंटी के दे दी जाए। हाईकोर्ट के आदेशानुसार छह सप्ताह की ये डेडलाइन 27 जनवरी को समाप्त हो गई लेकिन एनपीसीआईएल के अधिकारी किसानों को पैसा देने की बजाए सुप्रीम कोर्ट में चले गए। वहां एनपीसीआईएल को मुंह की खानी पड़ी है और कोर्ट ने किसानों के हक में फैसला दिया है।


एनपीसीआईएल के वकील के अनुरोध पर दिया गया समय
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आरके अग्रवाल एवं जस्टिम अभय मनोहर की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई करते आदेश में साफ तौर पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट को एनपीसीआईएल बनाम शमशेर सिंह इत्यादि किसान गोरखपुर के मामले में हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ कोई ग्राउंड नहीं मिलता है, जिसके आधार पर आदेश में बदलाव किया जाए।

खंडपीठ ने हाईकोर्ट का फैसला जस का तस लागू करते एनपीसीआईएल की याचिका खारिज कर दी। हालांकि एनपीसीआईएल के वकील नीरज कृष्ण कौल के अनुरोध पर एनपीसीआईएल के चीफ प्रोजेक्ट इंजीनियर को आठ सप्ताह का समय दिया जाता है कि वे इस दौरान किसानों को पूरी मुआवजा राशि का भुगतान करें। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गोरखपुर किसान संघर्ष समिति के प्रधान हंसराज सिवाच और कृष्ण सिवाच ने खुशी जताई है। दोनों ने कहा कि न्यायपालिका ने उन्हें उनका हक दिलाया है।
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न्यायपालिका का जो भी आदेश होगा, उसे तय समय में पूरा किया जाएगा। ये न्यायिक प्रक्रिया है, प्रत्येक को कानूनी तौर पर अपील का अधिकार था। अब कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा।
-पीएस तोमर, एचआर हेड, एनपीसीआईएल

 
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