शिक्षा विभाग अब 134-ए के तहत प्राइवेट स्कूलों की नींदें उड़ाने की तैयारी में है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी सत्र से 134-ए के तहत शिक्षा लेने वाले बच्चों की लिस्ट विभाग खुद जारी करेगा और यह भी विभाग ही तय करेगा कि कौन सा बच्चा कौन से स्कूल में जाकर शिक्षा ग्रहण करेगा। शिक्षा विभाग ने इससे संबंधित पत्र जिले के सभी स्कूलों को जारी कर दिया है। विभाग के इस फैसले के बाद मार्च में सत्र शुरू होने के समय प्राइवेट स्कूल संचालकों और शिक्षा विभाग के बीच जंग छिड़नी तय मानी जा रही है।
पुराने छात्रों को नहीं दिखा सकेंगे 134-ए के तहत
शिक्षा विभाग के ताजा फरमान में स्पष्ट तौर पर जिक्र है कि प्राइवेट स्कूल संचालक अब पिछले सत्र के उन बच्चों को 134-ए के तहत नए सत्र में एडमीशन नहीं दिखा सकेगा, जिन्होंने पिछले साल 134-ए के तहत शिक्षा ग्रहण की थी। कौन सा बच्चा 134-ए के तहत किस स्कूल में पढ़ाई करेगा, इसका फैसला शिक्षा विभाग करेगा। आसान शब्दों में समझा जाए तो 134-ए के तहत आवेदन करने वाले बच्चों की एक सूची बनाई जाएगी और ये सूची के अनुसार ही प्राइवेट स्कूलों को बच्चे अलॉट किए जाएंगे। स्कूल अब 134-ए के तहत पहले से शिक्षा ले रहे बच्चों को इस सूची में नहीं दिखा सकेंगे।
ये है शिक्षा विभाग की धारा 134-ए
शिक्षा विभाग द्वारा गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा दिलाने के लिए 134-ए का प्रावधान तय किया था। इसके तहत प्रत्येक प्राइवेट स्कूल को 10 प्रतिशत बच्चों को शिक्षा निशुल्क देनी होती है। इन बच्चों की फीस सरकार प्राइवेट स्कूलों को देती है। पिछले सत्र में बच्चों की फीस सरकार द्वारा नहीं भेजी गई जिसके चलते स्कूल संचालकों ने इस पर ऐतराज भी जताया था। इसी के चलते पिछले सत्र में अनेक बच्चों ने प्राइवेट स्कूलों पर उन्हें एडमीशन नहीं देने का आरोप भी लगाया था। अब 134-ए के तहत विद्यार्थियों को स्कूल शिक्षा विभाग अलॉट करेगा, ऐसे में एक बार फिर शिक्षा विभाग और प्राइवेट स्कूल संचालक आमने-सामने आ सकते हैं।
फार्म छह से आगामी सत्र की फीस भी हो चुकी है फिक्स
इससे पहले शिक्षा विभाग फार्म छह का नियम लागू कर प्राइवेट स्कूल संचालकों के हाथ पहले ही बांध चुका है। जिले के लगभग चार सौ से अधिक स्कूलों में से महज 178 स्कूलों ने फार्म छह भरकर सबमिट कराया है। इन स्कूलों के अलावा बाकी स्कूल आगामी सत्र से अपनी फीस भी नहीं बढ़ा सकेंगे। ऐसा करने पर अभिभावकों की एक शिकायत इन स्कूलों पर भारी पड़ सकती है।
प्राइवेट स्कूलों को भेजा गया विभाग का आदेश
विभाग के आदेशों को आगे प्राइवेट स्कूलों को भेज दिया गया है। आगामी सत्र से 134-ए के तहत शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चे किस स्कूल में जाएंगे, ये शिक्षा विभाग तय करेगा। साफ शब्दों में कहा जाए तो 134-ए के तहत बच्चों को स्कूल अलॉट करने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की रहेगी। इसका उल्लंघन करने पर प्राइवेट स्कूल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही भी की जा सकती है।
-यज्ञदत्त वर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद ।