जाखल के लोगों की अब एक ही मांग सामने आ रही है वह यह कि 17 साल पहले भंग की गई नगरपालिका का गौरव जाखल मंडी को पुन: दिया जाए। इसके लिए भले ही लोगों पर चूल्हा टैक्स अथवा खर्चों की बढ़ोतरी हो लेकिन इसके बदले यहां के विकास में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए।
जाखल मंडी नगरपालिका को वर्ष 2000 में पूर्व की चौटाला सरकार की ओर से भंग कर दिया गया था। इस दौरान अकेली जाखल मंडी नहीं बल्कि प्रदेश की अन्य 36 नगरपालिकों को भी भंग कर जाखल मंडी सहित उन्हें भी ग्राम पंचायत का दर्जा दे दिया गया था। जिनमें जिला की भूना नगरपालिका भी भंग की गई नगरपालिकाओं में शामिल थी। लेकिन धीरे धीरे समय बीतने के साथ लोगों ने बदली प्रदेश की सरकारों से नगरपालिका को फिर से बहाल करने की मांग उठाई।
लोगों ने सरकार के समक्ष मुद्दा उठाया कि बिना नगरपालिका के क्षेत्र का संपूर्ण विकास नहीं हो रहा है। ऐसे में सरकार ने भी इन इलाकों के लोगों की मांग व क्षेत्र की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए करीब आधी से भी ज्यादा भंग की गई नगरपालिकाओं को बहाल कर दिया व उन्हें पुन: नगरपालिका का दर्जा दे दिया गया। इससे भूना को भी नगरपालिका का दर्जा मिल गया।
इसके बावजूद जाखल मंडी को अभी तक नगरपालिका का दर्जा नहीं मिला है। इसके अलावा, तीन दिशाओं से पंजाब सीमा से सटा होने के कारण यहां पर समस्याओं का अंबार लगा है। उच्च स्तरीय शिक्षा संसाधनों की कमी होना यहां की सबसे बड़ी समस्या है। हालांकि, प्रदेश सरकार द्वारा यहां पर एक आईटीआई का निर्माण करवाने की कवायद शुरू कर दी है, लेकिन एक महिला महाविद्यालय, एक उच्च स्तरीय शिक्षा संस्थान ,बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर बड़ा अस्पताल, चिकित्सकों की कमी भी यहां की बड़ी समस्या है। लोगों को उम्मीद है कि अगर नगरपालिका का गठन होता है तो उनकी समस्याएं काफी हद तक दूर होंगी व विकास के भी नए आयाम बनेंगे।
अमर उजाला ने जाखल मंडी को ग्राम पंचायत अथवा नगरपालिका बनाए जाने के बारे में लोगों की राय ली। अधिकतर लोगों ने खुलकर मांग की कि जाखल मंडी के खोए हुए सम्मान को वापस लौटाया जाए व इसे पुन: नगरपालिका का दर्जा दिया जाए।
मंडी के व्यापारी कैलाश सिंगला, महावीर प्रसाद गर्ग, सुरेंद्र जैन व अमृतलाल ने कहा कि जाखल मंडी को अगर नगरपालिका का दर्जा मिले तो यहां पर पानी की निकासी की समस्या से छुटकारा मिलेगा। विकास के कार्य के लिए सरकार की ओर से मिलने वाली ग्रांट भी ज्यादा आएगी। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, जलापूर्ति, सड़कें तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं में भी बढ़ोतरी होगी। भले ही इसके लिए नगरपालिका में उन्हें अतिरिक्त करों के नाम पर खर्चों का बोझ बढ़े, लेकिन मंडी को नगरपालिका का दर्जा मिलने से ही यह आगे बढ़ सकती है।