अमित रूखाया। इस साल दिवाली पर फतेहाबाद शहर के लोग 25 लाख से ज्यादा के पटाखे एक ही रात में फूंक देंगे। हालांकि पिछले साल की तुलना में ये तकरीबन 8 से दस लाख रुपये कम होगा, बावजूद इसके पटाखा व्यापारी हार मानने को तैयार नहीं है। शहर के पटाखा व्यापारी फिर भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि त्योहार नजदीक आते-आते लोगों का पटाखा प्रेम जगेगा और पिछले साल की तरह इस बार भी फतेहाबाद के लोग दिवाली की रात को खूब धूम-धड़ाका करने की तैयारी शुरू कर देंगे और उनके पटाखे भी खूब बिकेंगे।
चाइनीज पटाखों पर प्रतिबंध और मंदी का असर है बड़ा कारण
इस बार चाइनीज पटाखों पर केंद्र सरकार की ओर से पूर्ण रूप से प्रतिबंध है। इसके तहत ना तो रिटेल और ना ही होलसेल में चाइनीज पटाखों का कोई स्टाक कर सकता है और ना ही कोई इनको बेच सकता है। ऐसे में चाइनीज पटाखों पर प्रतिबंध से फतेहाबाद के पटाखा बाजार पर अच्छा-खासा असर पड़ा है। फिलहाल भारत-पाक तनाव के बीच चीन द्वारा पाक का समर्थन करने से भारतीय भी भड़के हुए हैं और चीन निर्मित सामान नहीं खरीदने को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। उसके चलते ब्लैक में बिकने वाले चाइनीज पटाखे भी इस बार बाजार से बाहर हैं। इसके अलावा मंदी का दौर इस बार पटाखों की कमी बिक्री के लिए सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। पटाखा विक्रेताओं की मानें तो पूरे बाजार पर मंदी का साया है, ऐसे में पटाखा बाजार भी इससे अछूता नहीं है। विक्रेताओं के अनुसार पहले बाजार में तेजी का दौर था तो अच्छे पैसे जेब में होने के चलते कुछ लोग 3 हजार या पांच हजार के पटाखे भी रिटेल में ले लिया करते थे लेकिन पिछले कुछ समय से लगातार चली आ रही मंदी ने ये शौक भी छीन लिया है।
5 होलसेल गोदाम शहर में, दिल्ली से आता है फतेहाबाद में पटाखों का माल
यूं तो पटाखों के लिए कई मंडियां हैं लेकिन फतेहाबाद में पटाखों का अधिकतर माल दिल्ली के सदर बाजार इलाके से आता है। फतेहाबाद शहर की बात की जाए तो फतेहाबाद में तकरीबन 5 होलसेल गोदाम हैं जो शहर के भट्टू रोड पर बाईपास के पास स्थित हैं। यहीं पर शहर से जुड़े अधिकतर रिटेल व्यापारी और लोग पटाखे खरीदने आते हैं। इन पटाखा विक्रेताओं की मानें तो उन्हें अंदेशा नहीं था कि इस बार पटाखों का बाजार इतना ठंडा रहेगा। इन विक्रेताओं की चिंता अब इस बात को लेकर भी अगर इस बार दीवाली तक पटाखों का स्टाक क्लियर नहीं होता तो अगले साल तक इनके भंडारण को लेकर भी खासी परेशानी होनी तय है।
अवैध पटाखों से भी विक्रेताओं को नुकसान, सरकार को राजस्व का नुकसान
जिले में अवैध पटाखों का धंधा भी खूब जोर पकड़ रहा है। इसी माह रतिया से अवैध पटाखों का जखीरा पकड़ा गया था। इसके अलावा बीते दिनों रतिया चुंगी से भी पटाखों की खेप पकड़ी गई थी। ये अवैध पटाखा विक्रेता पटाखों को शहर और गांवों के अंदर छोटी-छोटी दुकानों पर पहुंचा देते हैं जिसका सीधा नुकसान होलसेल एवं लाइसेंस लेकर पटाखा बेचने वाले थोक व्यापारियों को होता है। इतना ही नहीं, अवैध पटाखा बेचने वाले किसी प्रकार का कोई टैक्स भी नहीं भरते जिससे सरकार को राजस्व का भी नुकसान होता है।
ये है शहर के पटाखा विक्रेताओं की राय
इस बार पटाखा बाजार बहुत मंदा है। पिछले साल की तुलना में इस बार हमारी सेल में तकरीबन 4-5 लाख रुपये कमी आने की आशंका है। चाइनीज पटाखों पर बिक्री पर प्रतिबंध से फर्क पड़ा है लेकिन हमें इसका गम नहीं है, चीन को सबक सिखाना जरूरी है।
-वीरेंद्र नारंग, संचालक, नारंग पटाखा हाउस
इस बार तो पटाखों की पूरी खपत ही होती नहीं दिख रही। पिछले साल बेहतर हालात थे, दाम कम थे और सारे पटाखे बिक गए थे। इस बार दाम भी ज्यादा हैं और खपत भी कम है। सबसे ज्यादा दिक्कत तो दीवाली के बाद बचे हुए पटाखों का भंडारण करने को लेकर आएगी।
-अमित नागपाल, संचालक, अमित पटाखा हाऊस
ग्राहकों की भी सुनिए
फसल जरूर अच्छी है लेकिन चार फसलों के बाद जाकर अच्छी फसल हुई है। ऐसे में आढ़ती का कर्ज उतारना जरूरी है। अगली बार भी अच्छी फसल हुई तो अधिक पटाखे खरीदेंगे, इस बार तो कुछेक पटाखों से ही काम चलाएंगे।
-सुनील, निवासी जांडवाला सोतर
इस बार पटाखों में बहुत ज्यादा रुचि नहीं है। मंदी भी है, तो जरूरी चीजों पर ही पैसा खर्च करने बारे सोच रहे हैं। अगर बच्चों की जिद रही तो ही थोड़ा बहुत पटाखे खरीदेंगे।
-दीपक कुमार, निवासी हिसार
ये हैं पटाखा गोदाम के नियम
1. पटाखा बेचने के लिए लाइसेंस लिया जाना आवश्यक है।
2. पटाखों से संबंधित सभी बिल एवं जरूरी कागजात साथ रखना आवश्यक है।
3. आग बुझाने के सभी आवश्यक प्रबंध होने अनिवार्य हैं।
4. पटाखा गोदाम शहर एवं आबादी से काफी दूर होने अनिवार्य हैं।