रथ में सवार होकर बारात लेकर जाती एडवोकेट कीर्ति गिल्होत्रा ।
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नारी सशक्तीकरण की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है, इसकी बानगी एक बार फिर से फतेहाबाद शहर में देखने को मिली। और इस बार महिला सशक्तीकरण की वाहिनी बनी जिला कोर्ट में वकालत कर रही एडवोकेट कीर्ति गिल्होत्रा। दूल्हे की बजाय दुल्हन रथ में सवार होकर बारात लेकर पहुंची। बारात का स्वागत होटल के गेट पर खड़े ससुराल पक्ष के लोगों ने किया। शादी भी बिना दहेज के हुई। शहर में शादी को लेकर दिनभर चर्चा रही।
कीर्ति गिल्होत्रा की रतिया के अमन वधवा के साथ शादी तय हुई थी।
कीर्ति गिल्होत्रा और उनके पिता सुभाषचंद्र इस शादी के जरिये समाज को बेटा-बेटी में भेद नहीं करने का संदेश देना चाहते थे। इसी कारण उन्होंने अपनी बेटी को बेटे की तरह रथ में सवार होकर बारात निकालने की मंशा जताई। इस पर कीर्ति के ससुरालजनों ने भी हामी भर दी।
शुक्रवार को सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार हुआ। हिसार रोड पर सोमा सिटी के अंदर स्थित एक होटल में कीर्ति और अमन वधवा की शादी का कार्यक्रम था। एडवोकेट कीर्ति दोपहर को सब्जी मंडी के सामने एक सजे-धजे रथ पर सवार हुई। रथ के आगे उनके परिजन नाच-गा रहे थे।
बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं और मेरी बेटियों ने हमेशा मेरा सिर ऊंचा किया है। ऐसे में समाज को यह संदेश देना चाहता था कि बेटियां किसी मायने में बेटों से पीछे नहीं हैं। इसलिए बेटी को बेटे की तरह रथ में बिठाकर उसकी बारात लेकर शादी करने गए।
सुभाष चंद्र गिल्होत्रा, कीर्ति गिल्होत्रा के पिता