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तीन साल बाद भी नहीं मिली चार संस्थाओं को जमीन

Thu, 22 Dec 2016 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
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पुरानी कचहरी , जिसकी जमीन पर कई इमारतें बनी हुई हैं। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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 पुरानी कचहरी से जब कोर्ट शिफ्ट हुई तो उसके बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि सरकार अब इस जमीन पर आम आदमी से जुड़ी हुई कुछ इमारतें बनाकर राहत प्रदान करेगी। पूर्व की सरकार ने ब्राह्मण धर्मशाला, प्राइमरी स्कूल, रविदास छात्रावास, पार्क और गुरुद्वारा सभा को जमीन अलॉट भी कर दी, लेकिन चार साल बीतने के बाद भी अभी तक महज गुरुद्वारे को ही जमीन धरातल पर अलाटमेंट हो सकी है। इस पर निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। वहीं दूसरी ओर शहर की चार प्रमुख संस्थाएं अभी तक सरकार से इस बारे में हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रही हैं। दूसरी ओर जिला प्रशासन के अधिकारी कंडम इमारतों को ढहाने के लिए ठेकेदार ना मिलने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहा है।


पुरानी कचहरी में कार्यालय अन्य जगह स्थानांतरित हुए तो सामाजिक संगठनों ने इस पांच एकड़ जमीन पर सरकारी स्कूल, पार्क, ब्राह्मण धर्मशाला, रविदास छात्रावास, गुरुद्वारा के लिए जगह की मांग की थी। पूर्व की सरकार ने लोगों की मांग को देखते इस जगह में से 9 कनाल पार्क के लिए, 9 कनाल स्कूल के लिए, चार कनाल गुरुद्वारे के लिए, दो-दो कनाल ब्राह्मण सभा और रविदास सभा को देने की घोषणा कर दी। चार साल बीत गए ये संस्थाएं अभी तक नित प्रतिदिन प्रशासन के पास चक्कर काट रहे हैं। वजह है कि गुरुद्वारे को छोड़कर अन्य संस्थाओं को धरातल पर जमीन अलाट नहीं हो सकी है। प्रशासन का तर्क है कि इस जगह पर अभी तक ट्रैफिक थाना, को-ऑपरेटिव सोसाइटी का रजिस्ट्रार, कृषि विभाग और पुराना लिटिगेशन हॉल की बिल्डिंग बनी हुई है।
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बिल्डिंग को गिराकर मलबा साफ करने के बाद ही जगह की पैमाइश होगी और मलबा गिराने के लिए ठेकेदार नहीं मिल रहे। जिला प्रशासन ने पहले पूरी बिल्डिंग गिराने के लिए 11 लाख में टेंडर आमंत्रित किया था लेकिन वहां पहुंचे ठेकेदारों का तर्क था कि इस बिल्डिंगों में इतना मलबा नहीं निकल सकता और उन्हें नुकसान होगा। प्रशासन ने तर्क को मानते टेंडर को घटाकर 9 लाख रुपये कर दिया। तब भी ठेकेदार आगे नहीं आए। ठेकेदारों व पार्क बनाओ संघर्ष समिति का कहना है कि प्रशासन यहां स्क्रैप का रेट ज्यादा लगा रखा है। पुराना सरिया व ईंटें आधी दरों पर बिकती हैं जबकि यहां पर दाम ज्यादा लगाई है। प्रशासन रेट कम करें तो बिल्डिंग गिराने के लिए ठेकेदार मिल जाएंगे। दूसरीी ओर प्रशासन का कहना है कि ये संस्थाएं स्वयं ही अपने-अपने हिस्से की बिल्डिंग गिरा दें और रिजर्व प्राइस सरकार को दे देें। ऐसे में समस्या का समाधान भी हो जाएगा और किसी को नुकसान भी नहीं होगा।


इन दरों पर मलबे को खरीदना घाटे का सौदा
पुरानी कचहरी वाले स्थान पर बनी पुरानी इमारत के मलबे को लेकर प्रशासन द्वारा बार-बार नीलामी के प्रयास किए गए लेकिन इस मलबे की एस्टीमेट में दर्ज अनुमानित कीमतें बाजार भाव से कहीं ज्यादा है जिसके चलते कोई भी ठेकेदार इस नीलामी को लेकर अपनी रुचि नहीं दिखा रहा है। ठेकेदार के लिए इन दरों पर इस मलबे को खरीदना घाटे का सौदा है।
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-संघर्ष समिति के संयोजक मोहन लाल नारंग


पुराना मलबा इन संस्थाओं के काम आएगा, दिक्कत होगी खत्म
अब तक रिजर्व प्राइस ज्यादा मानते हुए ठेकेदार नहीं मिले। इस मामले में संस्थाएं खुद आगे आएं और इन पुरानी बिल्डिंगों को खुद गिरवाएं और रिजर्व प्राइस सरकार को सबमिट करवा दें। पुराना मलबा इन संस्थाओं के काम आ जाएगा, ऐसे में काम में आ रही बाधा भी खत्म हो जाएगी।
-विजेंद्र भारद्वाज, जिला राजस्व अधिकारी, फतेहाबाद।

 
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