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वजह अलग-अलग, हादसे हर तरफ

Fri, 05 Aug 2016 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
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सुरेंद्र असीजा। फतेहाबाद जिले की सड़कें डेथ ट्रैक में तब्दील होती जा रही हैं। इस साल के पहले छह महीने में ही 117 सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें 54 लोग अपनी जान गवां चुके हैं। हैरत तो इस बात को लेकर भी है कि लगातार बढ़ते सड़क हादसों के बावजूद जिले के लोग यातायात नियमों की लगातार अनदेखी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। इन हादसों की बढ़ती संख्या के पीछे कोई एक नहीं बल्कि कई कारण सामने आए हैं।


वजह-1- टूटी सड़कें
टोहाना, फतेहाबाद, रतिया, भूना और जाखल में पिछले 10 सालों में नई सड़कों का निर्माण नहीं किया गया है। सीवरेज और टेलीफोन के लिए खोदी गई सड़कें दोबारा नहीं बनी। ऊपर से बारिश का पानी भरने से बची खुची सड़कें भी जगह-जगह से टूट गईं हैं। इसके चलते सड़क हादसों में वृद्धि होती जा रही है। खराब सड़कों का सबसे ज्यादा असर दो पहिया वाहनों पर पड़ा है। सबसे ज्यादा हादसे मेें इन्हीं वाहनों के सवारों के साथ हुए हैं।
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वजह-2- युवाओं की मस्ती, अभिभावक बेपरवाह
सड़कों पर खून बहने के पीछे युवाओं की मस्ती और अभिभावकों की नजरअंदाजी एक बड़ा कारण बनकर उभरा है। रईस घरों के नाबालिग बच्चे भी तेज गति से कारें दौड़ाते दिखाई देते हैं। उनकी गाड़ी में सीट बेल्ट हो ना हो, लेकिन उनकी कारों का साउंड सिस्टम मानो पूरे शहर को सुनाने के लिए काफी होता है। ऐसे नाबालिग बच्चों के हाथ में स्टेयरिंग आने से भी सड़कें लाल हुई हैं।


लावारिस पशु
जिलेभर में घूम रहे आवारा सांड़ों के कारण सबसे ज्यादा सड़क हादसे हुए हैं। रात-दिन ये आवारा पशु सड़कों पर घूमते हैं। रात के समय तो अंधेरे में ना दिखने से ये आवारा पशु और खतरनाक हो जाते हैं। बीते दिनों में कई ऐसे हादसे हुए, जिनमें लावारिस पशुओं के चलते लोगों को जान गंवानी पड़ती है। पुलिस रिकॉर्ड के मुुताबिक छह महीने में 100 से अधिक हादसे अकेले इन्हीं पशुओं के चलते होते हैं।

संवेदनशील मोड़ों पर नहीं हैं चेतावनी बोर्ड
जिले की हद में बहुत से ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं जो दुर्घटना के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। हालांकि प्रशासन ने इन स्थानों पर दुर्घटनाओं को टालने के लिए कोई विशेष प्रबंध नहीं किए हैं। यहां तक कि इन स्थानों पर कोई चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगाया गया है। इसके चलते तेज गति से आते वाहन चालकों को मोड़ के बारे में उपयुक्त जानकारी नहीं मिल पाती और यही हादसों का सबब बनती है।


आंकड़ों की नजर में
पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल जनवरी से लेकर 30 जून तक कुल 117 सड़क दुर्घटनाएं हुई। इनमें 49 हादसे भीषण दुर्घटनाओं के थे। इन हादसो में कुल 54  लोगों की मौत हुई जबकि 105 लोग घायल हुए। बीते वर्ष साल 2015 में एक जनवरी से 31 दिसंबर के दौरान कुल 273 सड़क हादसे हुए। इनमें 95 मामलों को भीषण हादसों की श्रेणी में रखा गया। इन हादसों में कुल 104 लोगों ने अपनी जान गंवाई जबकि 273 लोग इन हादसों में घायल होकर अस्पताल पहुंचे।
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यातायात के नियमों की अवहेलना से सड़क हादसों की संभावना बढ़ती है। अगर लोग यातायात के प्रति गंभीर हो जाएं तो हादसों में निश्चित तौर पर कमी लाई जा सकती है और कीमती इंसानी जान भी बचाई जा सकती है। पुलिस विभाग इस दिशा में लगातार प्रयास करता रहता है और आगे भी इस दिशा में और प्रयास किए जाएंगे।
-गंगाराम पूनियां, एएसपी, फतेहाबाद
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