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12 जनवरी को होगी कंडम चैंबरों की नीलामी

Sun, 08 Jan 2017 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
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23 दिसंबर के अंक में प्रकाशित खबर, - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आखिरकार जिला प्रशासन ने एक बार फिर से पुरानी कचहरी की जमीन को बाकी संस्थाओं को अलॉट करने की कवायद शुरू कर ही दी है। रविवार को जारी एक बयान में उप मंडल अधिकारी (ना) फतेहाबाद सतबीर सिंह जांगु ने बताया कि 12 जनवरी को  सुबह 11 बजे कचेहरी स्थल फतेहाबाद में पुरानी कचेहरी और वकीलों के लिए बने चैंबरों के मलबे की नीलामी होगी। नीलामी में भाग लेने के लिए इच्छुक बोलीदाता को धरोहर राशि के रूप में 20 हजार रुपये की राशि मौके पर जमा करवानी होगी।  इससे पहले प्रशासनिक अधिकारी मलबे के लिए ठेकेदार न मिलने का बहाना बनाकर बोली को लगातार टालते आ रहे थे। इसका शहर की चार प्रमुख संस्थाएं लगातार विरोध कर रही थी। हालांकि प्रशासन ने अभी तक ये पत्ते नहीं खोले हैं कि इस बार मलबे के दामों में कमी की गई है या नहीं ।


ये था मामला
पुरानी कचहरी में कार्यालय अन्य जगह स्थानांतरित हुए तो सामाजिक संगठनों ने इस पांच एकड़ जमीन पर सरकारी स्कूल, पार्क, ब्राह्मण धर्मशाला, रविदास छात्रावास, गुरुद्वारा के लिए जगह की मांग की थी। पूर्व की सरकार ने लोगों की मांग को देखते हुए इस जगह में से नौ कनाल पार्क के  लिए, नौ कनाल स्कूल के लिए, चार कनाल गुरुद्वारे के लिए, दो-दो कनाल ब्राह्मण सभा और रविदास सभा को देने की घोषणा कर दी। चार साल बीत गए ये संस्थाएं अभी तक नित प्रतिदिन प्रशासन के पास चक्कर काट रहे थे, क्याेंकि गुरुद्वारे को छोड़कर अन्य संस्थाओं को धरातल पर जमीन अलाट नहीं हो सकी थी। प्रशासन का तर्क था कि इस जगह पर अभी तक ट्रैफिक थाना, कोऑपरेटिव  सोसाइटी का रजिस्ट्रार, कृषि विभाग और पुराना लिटिकेशन हाल की बिल्डिंग बनी है। बिल्डिंग को गिराकर मलबा साफ करने के बाद ही जगह की पैमाइश होगी। मलबा गिराने के लिए ठेकेदार नहीं मिल रहे।
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जिला प्रशासन ने पहले पूरी बिल्डिंग गिराने के लिए 11 लाख में टेंडर आमंत्रित किया था, लेकिन वहां पहुंचे ठेकेदारों का तर्क था कि इस बिल्डिंगों में इतना मलबा नहीं निकल सकता और उन्हें नुकसान होगा। प्रशासन ने तर्क को मानते हुए टेंडर को घटाकर नौ लाख रुपये कर दिया। तब भी ठेकेदार आगे नहीं आए।
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ठेकेदारों और पार्क बनाओ संघर्ष समिति ने भी उस समय आरोप लगाया था कि प्रशासन यहां स्क्रैप का रेट ज्यादा लगाया है। पुराना सरिया व ईंटें आधी दरों पर बिकती हैं जबकि यहां पर दाम ज्यादा लगे हैं। प्रशासन रेट कम करे तो बिल्डिंग गिराने के लिए ठेकेदार मिल जाएंगे।
 
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