फतेहाबाद। नशे के दलदल में फंसे युवाओं के उपचार के लिए केंद्र सरकार ने टोहाना में 15 बेड का एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (एटीएफ) सेंटर खोलने की करीब पांच माह पहले मंजूरी दी थी। इसको लेकर बाकायदा एक डॉक्टर को ट्रेनिंग दी गई लेकिन पांच माह गुजरने के बाद भी यह परियोजना अधूरी है। यहां तक कि एटीएफ सेंटर के लिए डॉक्टर व स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया तक ही पूरी नहीं हो सकी है। हालात ये है कि ओपीडी स्तर पर ही मरीजों का उपचार चल रहा है। यहां पर मेडिकल ऑफिसर, नर्स, काउंसलर और डाटा मैनेजर भर्ती किए जाने हैं, लेकिन विधानसभा चुनावों के चलते भर्ती प्रक्रिया रोक दी गई। अब भर्ती प्रक्रिया फिर से शुरू की गई है। फिलहाल नशे से ग्रस्त गंभीर मरीजों को जिला मुख्यालय स्थित नशा मुक्ति केंद्र में भेजा जा रहा है। नशा मुक्ति केंद्र में मनोचिकित्सक की ओपीडी में रोजाना 50 से 60 मरीज आते हैं।
रतिया में नशा मुक्ति केंद्र की मंजूरी मिली लेकिन स्टाफ भर्ती नहीं
रतिया के नशा मुक्ति केंद्र को भी लाइसेंस मिल चुका है और यहां के डॉक्टर दीप को इसकी ट्रेनिंग दी गई है। यहां भी ओपीडी स्तर पर ही केंद्र चल रहा है और इमरजेंसी में ही मरीज को दाखिल किया जा रहा है। स्टाफ भर्ती की यहां पर प्रक्रिया ही नहीं की गई है। एसएमओ डॉ. अमित का कहना है कि उनके पास स्टाफ को लेकर फिलहाल कोई डिमांड नहीं आई है।
नशे से ग्रस्त मरीजों के लिए जिले में 35 बेड
नशा मुक्ति केंद्र फतेहाबाद में वर्ष 2018 में शुरू हुआ था। यहां पर 10 बेड की मंजूरी मिली। इसके बाद इसी साल टोहाना में 15 बेड और रतिया में 10 बेड की मंजूरी मिली है। नशे से ग्रस्त मरीजों के लिए 35 बेड की सुविधा है। नशा मुक्ति केंद्र फतेहाबाद में सीरींज के जरिये नशा लेने वाले युवाओं के लिए वर्ष 2023 में ओएसटी शुरू किया गया।
फतेहाबाद नशा मुक्ति केंद्र की ओपीडी और दाखिल मरीजों की स्थिति
वर्ष ओपीडी दाखिल हुए मरीज
जनवरी 2024 160 14
फरवरी 186 19
मार्च 153 17
अप्रैल 232 20
टोहाना में एटीएफ की ओपीडी में मरीजों की जांच की जाती है। भर्ती प्रक्रिया सिविल सर्जन कार्यालय फतेहाबाद की तरफ से चल रही है। भर्ती पूरी होने के बाद एटीएफ औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा।
- डॉ. कुनाल, एसएमओ एवं इंचार्ज एटीएफ, टोहाना।
ओएसटी फतेहाबाद में एएनएम के खाली पद और एटीएफ टोहाना में स्टाफ भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा। आचार संहिता लगने के कारण इसे रोक दिया गया था।
- डॉ. महेंद्र, सिविल सर्जन, फतेहाबाद।