रतिया। कांता देवी मंगला (81) भले ही दुनिया से विदा हो गईं लेकिन उनकी आंखें अब दो जरूरतमंद लोगों को दुनिया देखने का अवसर दे रही हैं। निधन के बाद परिजनों की सहमति से नेत्रदान करवाया गया। दोनों कॉर्निया जरूरतमंदों को प्रत्यारोपित किए जा चुके हैं।
कांता देवी मंगला का निधन 14 अक्तूबर का हुआ था। उनके निधन की सूचना मिलने पर भारत विकास परिषद शाखा रतिया के गतिविधि संयोजक सेवा जनक राज गोयल ने परिवार से संपर्क किया और उन्हें इस नेक कार्य के लिए राजी किया।
नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी करवाने के लिए समाजसेवी एवं गोगा मेड़ी रतिया के प्रधान रामगोपाल पाल और राम आश्रम रतिया के प्रधान विनोद बंसल का सहयोग लिया गया। इसके बाद भारत विकास परिषद शाखा रतिया के अध्यक्ष राजकुमार सिंगला ने लायंस आई बैंक, सिरसा की टीम से संपर्क किया।
टीम सिरसा से रतिया पहुंची और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर नेत्रदान संपन्न करवाया। कांता देवी की आंखों के दोनों कॉर्निया जरूरतमंद व्यक्तियों को प्रत्यारोपित किए जा चुके हैं। इससे उन्हें दुनिया देखने और जीवन में नई रोशनी पाने का अवसर मिला है।
भारत विकास परिषद शाखा रतिया के गतिविधि संयोजक संपर्क एडवोकेट नरेंद्र कुमार मलिक ने कहा कि परिषद का उद्देश्य समाज के लोगों को रक्तदान, नेत्रदान और अन्य सेवा कार्यों के लिए प्रेरित करना है। कांता देवी के परिजनों का यह निर्णय दूसरों को भी नेत्रदान के लिए आगे आने की प्रेरणा देता है।
-
नेत्रदान किसी जरूरतमंद के जीवन में नई रोशनी लाने का सशक्त माध्यम है। लोगों को इस नेक कार्य के प्रति जागरूक होना चाहिए। मृत्यु के बाद नेत्रदान का निर्णय किसी दूसरे व्यक्ति को दुनिया देखने का अवसर दे सकता है। लोगों को जागरूक होते हुए इसके लिए आगे आना चाहिए।
- डॉ. राकेश कस्वां, नेत्र रोग विशेषज्ञ।