फतेहाबाद। हसंगा गांव के रहने वाले 75 वर्षीय रामस्वरूप कुकणा देशभर में लोगों के लिए उदाहरण हैं कि उम्र चाहे जो भी हो अगर हौसले बुलंद हैं तो दूसरों का मोहताज नहीं होना पड़ता। बिना एथलेटिक्स कोच के आज वह अकेले ही आत्मनिर्भरता के साथ एथलेटिक्स खेलों में प्रतिद्वंद्वी प्रतिभागियों को पछाड़ रहे हैं।
रामस्वरूप कुकणा ने मुंबई मैराथन 2025 जनवरी में 42 किलोमीटर की फुल मैराथन दौड़ प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने प्रतियोगिता के दौरान 3 घंटे 37 मिनट 40 सेकंड में दौड़ पूरी करके पहला स्थान हासिल किया। वहीं 21, 10 व 5 किलोमीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीतना रामस्वरूप कुकणा के लिए बाएं हाथ का खेल बन चुका है। उन्हें महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया राम स्वरूप इसके अतिरिक्त बंगलूरू, दिल्ली, लखनऊ, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, देहरादून आदि राज्यों में अपनी प्रतिभा के उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर पदक जीत चुके हैं ।
जीत चुके हैं 150 से अधिक पदक
75 वर्षीय रामस्वरूप कुकणा देशभर में आयोजित दौड़ प्रतियोगिताओं में भाग लेकर 150 से अधिक पदक जीत चुके हैं। वह 400, 800, 1600, 2000, 5000 मीटर जैसी दौड़ में युवा खिलाड़ियों को हराने की बात करते है। राम स्वरूप एक मिनट 16 सेकंड़ में 400 मीटर की दौड़ पूरी कर लेते हैं। इसका दौड़ प्रतियोगिता में रिकॉर्ड दर्ज है।
प्रतियोगिता में बदला नजरिया
ग्राम पंचायत हसंगा ने करीब 9 वर्ष पहले खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया था। प्रतियोगिता में बुजुर्गों की भी दौड़ शामिल की गई थी, जिसमें रामस्वरूप कुकणा ने 100 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में भागीदारी सुनिश्चित की थी और जब दौड़ रहे थे तो अचानक जमीन पर जा गिरे। इसी दौरान प्रतिभागी ने रामस्वरूप को चुभती हुई बात कह दी। उसी दिन से ही खेती-बाड़ी को छोड़कर एथलीट खेलों में अपना जीवन समर्पित कर दिया और तब से लेकर आज तक पीछे मुड़कर नहीं देखा। क्योंकि 100 मीटर की प्रतियोगिता में 10 कदम नहीं दौड़ पाने वाले रामस्वरूप कुकणा अब 42 किलोमीटर कुछ ही घंटों में नाप रहे हैं।
गांव हसंगा व भूथन कलां में निशुल्क देते हैं बच्चों को प्रशिक्षण
रामस्वरूप कुकणा काफी समय से अपने गांव हसंगा व साथ लगते गांव भूथन कलां में जाकर बच्चों को दौड़ प्रतियोगिता सहित अन्य खेलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करते है। वे निशुल्क गांव के बच्चों को एथलेटिक्स कोच के रूप में प्रशिक्षण देते है। उन्होंने बताया कि दोनों गांव के करीब 20 युवा विभिन्न विभागों में सरकारी नाैकरी लग गए हैं।