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बैंकों की 147 शाखाओं के कर्मचारी रहे हड़ताल पर, जिले में करोड़ों का लेनदेन प्रभावित

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फतेहाबाद के स्टेट बैंक के सामने नारेबाजी करते बैंक कर्मी। - फोटो : Fatehabad
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यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर सरकारी बैंकों के कर्मचारी सोमवार को हड़ताल पर रहे। बैंकों की 147 शाखाओं के कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से जिलेभर में करीब 110 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। सरकारी बैंकों के उपभोक्ताओं को दो दिन बाद भी बैंक नहीं खुलने से परेशानी झेलनी पड़ी। हालांकि, इस दौरान निजी बैंक व एटीएम खुले रहे। इसके चलते ग्राहकों को थोड़ी राहत मिली।
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बता दें कि अनाजमंडी स्थित स्टेट बैंक के बाहर बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया और सरकार विरोधी नारे लगाए। कर्मचारी नेता बीएस सेठी ने कहा कि वे किसी भी कीमत पर बैंकों का निजीकरण नहीं होने देंगे। बैंकों के निजीकरण से सरकार द्वारा खुलवाए गए जन-धन के खातों पर असर पड़ेगा। 42 करोड़ खाते सरकारी बैंकों में खोले गए हैं। क्षेत्रीय सचिव जगदीश मोंगा ने कहा कि सरकार की अधिकांश योजनाएं सरकारी बैंक ही लागू करते हैं। निजीकरण से आम आदमी की पहुंच से बैंक दूर हो जाएंगे और आने वाली पीढ़ी को नौकरी नहीं मिलेगी। कर्मचारी नेता नरेंद्र लांबा व पीएनबी बैंक से मनीष बेनीवाल ने कहा कि निजीकरण से देश आर्थिक ढांचा तहस नहस हो जाएगा।
सरकारी बैंकों के एटीएम में कैश खत्म
हड़ताल के पहले दिन एटीएम से रुपये निकालने में दिक्कत आई। ज्यादातर एटीएम में कैश समाप्त हो चुका था। चूंकि कर्मचारियों ने शुक्रवार को कैश डाला था। उसके बाद शनिवार व रविवार को बैंक बंद थे। ऐसे में ज्यादातर एटीएम दो दिन में खाली हो चुके हैं। हड़ताल मंगलवार तक रहेगी। जिले में करीब 38 निजी बैंक व उनकी शाखाएं हैं। उनमें पहले की तरह कामकाज होता रहेगा। सार्वजनिक क्षेत्र के 147 बैंक बंद रहे। सभी बैंक बुधवार को खुलेंगे।
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इन सुविधाओं से कम रही परेशानी
करीब 40 फीसदी ग्राहक ऑनलाइन लेनदेन करने लगे हैं।
38 निजी बैंक व उनके एटीएम चालू रहे।
लोगों को हड़ताल की पहले से थी सूचना, कईयों निपटा दिए लेनदेन।
बाजारों में उपलब्ध है मनी ट्रांसफर की सुविधा।
जिले में बैंकों की स्थिति
बैंकों की कुल शाखाएं 185
निजी बैंकों की शाखाएं 38
एटीएम 135
किसान आंदोलन का किया समर्थन
बैंक कर्मचारियों ने किसान आंदोलन का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किसानों पर जबरन तीनों कानून थोपे जा रहे हैं। वहीं किसान संघर्ष समिति, सर्व कर्मचारी संघ तथा सर्व कर्मचारी रिटायर्ड संघ ने भी कर्मचारियों की इस हड़ताल को समर्थन दिया है।
कोट
आम जनता अथवा ग्राहकों को परेशान करना हमारा उद्देश्य नहीं है। सरकार अपनी गलत नीतियां लागू कर बैंकिंग व्यवस्था को बिगाड़ने में लगी है। सरकार अपनी नीतियां हम पर थोप रही है। इसलिए सरकार की नीतियों के खिलाफ हमारी लड़ाई है।
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-जगदीश मोंगा, क्षेत्रीय सचिव, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन।
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