फतेहाबाद। गांव बड़ोपल में किसानों की मुआवजा राशि अपने करीबियों व रिश्तेदारों के खाते में डलवाने के मामले की जांच अब पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा करेगी। आर्थिक अपराध शाखा जल्द ही संबंधित मामले का रिकॉर्ड सीएम फ्लाइंग से लेकर जांच को आगे बढ़ाएगी। बता दें कि इस मामले में तत्कालीन पटवारी, कानूनगो और तहसीलदार समेत 27 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
पुलिस प्रवक्ता विनोद कुमार ने बताया मुख्यमंत्री फ्लाइंग की ओर से करीब दो वर्ष पहले इस मामले में जांच की गई थी। जांच में मिले दस्तावेज के आधार पर आर्थिक अपराध शाखा जांच करेगी। आर्थिक अपराध शाखा द्वारा गांव बड़ोपल के उन किसानों से संपर्क किया जाएगा, जिनकी फसल के खराबे का पैसा अन्य लोगों के खातों में डाला गया। वहीं, उन लोगों के से भी पूछताछ होगी, जिनके खाते में मुआवजा राशि डाली गई थी।
विनोद कुमार ने बताया कि खाते में पैसा डलवाने के लिए किन लोगों ने संपर्क किया, इसका ब्योरा एकत्र किया जाएगा। हालांकि आर्थिक अपराध शाखा को इस बात का फायदा जरूर मिलेगा कि सीएम फ्लाइंग द्वारा जो जांच की गई थी, उसमें किसानों के फोन नंबर का पूरा डाटा दर्ज है।
ये था मामला
जिले के गांव बड़ोपल में वर्ष 2021 में खरीफ की खराब हुई फसल के मुआवजा के लिए वर्ष 2022 में सरकार ने किसानों को देने के लिए तहसीलदार को राशि जारी की थी। पटवारी व उसके निजी सहायकों ने अपने चहेते किसानों व अन्य करीबियों के फर्जी फार्म भरवाकर तहसीलदार और नायब तहसीलदार से मिलीभगत करके राशि जारी कर दी। सीएम फ्लाइंग की जांच में मामले का खुलासा हुआ है कि कुल 8 लाख 53 हजार 689 रुपये का घोटाला किया गया है। शहर पुलिस ने शनिवार को सीएम फ्लाइंग के सब इंस्पेक्टर राजेश कुमार की शिकायत पर 27 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी व गबन के आरोप में मामला दर्ज किया था।
मेरा इस मामले से कोई लेना देना नहीं
जिस समय मुआवजे को लेकर घोटाला हुआ उसे समय तहसीलदार के पद पर रणवीर सुल्तानिया थे, जो कांग्रेस के नेता कैप्टन अजय सिंह यादव के भतीजे हैं। इस मामले में पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव का कहना है कि उनका इस मामले में नाम बेवजह घसीटा जा रहा है। उनका इस मामले में कुछ भी लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि मेरा नाम इस मामले में न जोड़ा जाए।