फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल मेंजांच करते हुए ईएनटी डॉ.जयप्रकाश संवाद
फतेहाबाद। बढ़ती सर्दी का असर नाक-कान और गले पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है। इनमें नाक से रक्त आने के मरीज भी ओपीडी में आ रहे हैं। इसके अलावा एलर्जी के कारण नाक से पानी आने, जुकाम और खांसी के कारण गले से रेशा आने के मरीज भी आ रहे है। इन रोगों के रोजाना 100 से 120 मरीज अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि प्रदूषण और ठंड के कारण दिक्कत ज्यादा बढ़ रही है, ऐसे में मास्क लगाकर ही घर से बाहर निकलें और ठंड से बचाव के कपड़े पहनें। विशेषज्ञ डॉ. जयप्रकाश का कहना है कि सर्दियों में शुष्क हवा, इनडोर हीटिंग और संक्रमण के कारण नाक-कान-गले के मरीजों में वृद्धि हुई है। इसमें नाक से खून आने की समस्या प्रमुख है।
शुष्क मौसम के कारण नाक की झिल्लियां सूख जाती हैं, जिससे रक्त वाहिकाएं फट सकती हैं। ज्यादा ठंड और गर्मी में ये समस्या रहती है। घर के अंदर की गर्म हवा और बाहर की ठंड हवा का मिश्रण नाक की झिल्लियों को सूखा देता है। इससे पपड़ी बनती है और खुजलाने या फूंकने से रक्तस्राव होता है।
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संक्रमण में वृद्धि
ठंड के मौसम में सर्दी-जुकाम, साइनस और श्वसन संक्रमण के मामले बढ़ जाते हैं, जो नाक की परत को कमजोर करते हैं। नाक में उंगली डालना, बहुत तेज या जोर से नाक साफ करना, या चोट लगना भी खून आने का कारण हो सकता है।
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ठंड लगातार बढ़ रही है और प्रदूषण भी ऐसे में संक्रमण का ज्यादा खतरा बढ़ रहा है। अगर घर से बाहर निकल रहे हैं तो मास्क जरूर लगाएं। इसके अलावा ठंड से बचाव के कपड़े डालें। डॉक्टर की सलाह से ही दवा लें।
- डॉ. जयप्रकाश, ईएनटी, नागरिक अस्पताल