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Fatehabad News: चिल्ली झील की संभाल न होने से गाद बढ़ गई, इससे बिगड़ी व्यवस्था

Mon, 03 Nov 2025 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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फतेहाबाद। स्थानीय बाल भवन में संचालित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का निरीक्षण कर जानकारी लेते
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फतेहाबाद। चिल्ली झील मामले पर मुख्यमंत्री नायब सैनी की जिला प्रशासन को फटकार लगाने के बाद सोमवार को आखिरकार जिला उपायुक्त की अगुवाई में पूरा प्रशासनिक अमला जायजा लेने पहुंचा। इस दौरान जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता देरी से पहुंचे तो उपायुक्त डा. विवेक भारती ने उन्हें डांट लगाई जबकि उन्होंने कहा कि वो समाधान शिविर में थे।
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इसके बाद उपायुक्त ने झील में फैली जलखूंबी व आसपास की खरपतवार को तुरंत हटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि झील की सफाई सतत प्रक्रिया के रूप में की जाए, ताकि यह जलस्रोत लंबे समय तक स्वच्छ और सुरक्षित बना रहे। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि झील के निर्माण से अब तक हुए बजट व्यय का पूरा ब्योरा तैयार कर शीघ्र उनके कार्यालय में प्रस्तुत किया जाए।

साथ ही, यदि झील से संबंधित कोई मामला न्यायालय में लंबित है तो उसकी विस्तृत जानकारी भी दस्तावेजी रूप में उपलब्ध करवाई जाए। प्रदेश सरकार की ओर से चिल्ली प्रोजेक्ट के लिए 13.58 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। वहीं चिल्ली झील के निरीक्षण के दौरान अतिरिक्त उपायुक्त अनुराग ढालिया, एसडीएम राजेश कुमार, नगराधीश गौरव गुप्ता, जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता बलविंद्र नैन, सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता एनके भोला सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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6.42 करोड़ में चार डिस्पोजल और रंगोई नाले तक बिछाई पाइपलाइन

चिल्ली के निरीक्षण के दौरान जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से डीसी विवेक भारती ने उनके द्वारा करवाए गए कामों के बारे में पूछा। जिसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग ने उन्हें बताया कि उनके विभाग ने फतेहाबाद का सारा पानी ग्रेविटी के जरिये जवाहर चौक होते हुए चिल्ली झील में एकत्रित होता था। उस पानी के लिए एसटीपी प्लांट, डिस्पोजल और रंगोई नाले तक अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाई गई। जनस्वास्थ्य विभाग को इस प्रोजेक्ट के लिए 8.42 करोड़ अलाट किए गए थे। कार्यकारी अभियंता से जब उपायुक्त ने उनसे प्रोजेक्ट के कंपलीशन को लेकर सवाल किया तो उनका जवाब था कि चार साल पहले भेजा था। हालांकि अभी तक जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी ही इन प्रोजेक्ट्स को संचालित कर रहे हैं। इसके चलते ही पिछले सालों में शहर में जलनिकासी पहले के मुकाबले अब काफी जल्दी हो जाती है। उधर नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि बाकी विभागों का काम खत्म होने के बाद ही सुंदरीकरण का काम शुरू किया जा सकता है। जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता देवेंद्र नैन ने कहा कि उनके विभाग की ओर से काम में कोताही नहीं बरती गई है। आज भी बरसात का पानी समय रहते निकल जाता है तो इसके पीछे जनस्वास्थ्य विभाग के प्रोजेक्ट्स ही हैं।

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डेढ़ करोड़ से सिंचाई विभाग ने निकाली थी गाद, तीन साल बाद दोबारा वही स्थिति

चिल्ली झील प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश सरकार से 13 करोड़ 58 लाख रुपये जारी किए गए थे। इसमें से जनस्वास्थ्य विभाग को 8.42 करोड़ रुपये दिए गए जिसमें से 6.42 करोड़ की लागत से चार डिस्पोजल और रंगोई नाले तक पाइपलाइन बिछाई गई। इसके अलावा तीन साल पहले सिंचाई विभाग ने 1.52 करोड़ खर्च करके चिल्ली झील से गाद निकाली थी लेकिन तीन साल बाद वही स्थिति दोबारा हो चुकी है। ऐसे में महंगाई और मजदूरी की लागत बढ़ने से इस बार गाद निकालने का खर्च पिछले बार से अधिक आ सकती है।





दिशा की बैठक में सांसद सैलजा ने साधा निशाना, सीएम सैनी ने भी लगाई फटकार

चिल्ली झील प्रोजेक्ट जिला प्रशासन के लिए गले की फांस बन गया है। पहले दिशा की बैठक के दौरान सांसद कुमारी सैलजा ने जिला प्रशासन पर चिल्ली को लेकर निशाना साधते हुए भ्रष्टाचार के आरोप जड़े तो इसके दो दिन बाद ही मुख्यमंत्री नायब सैनी ने फतेहाबाद पहुंचते ही बंद कमरे में अधिकारियों की बैठक लेकर उन्हें चिल्ली के फोटो दिखाकर इस मसले पर अच्छी खासी फटकार लगाई। सीएम सैनी ने उपायुक्त से दो दिन में इस प्रोजेक्ट से जुड़े सारे तथ्य उनके कार्यालय भेजने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये जारी किए हैं, एक-एक पैसे का हिसाब लिया जाएगा। इसके बाद ही सोमवार को ही उपायुक्त ने सबसे पहले चिल्ली का ही दौरा कर हालात का जायजा लिया।





पिछले 15 साल में आसपास हुए निर्माणों से बिगड़ी स्थिति, कोर्ट में अटकने से बढ़ी प्रोजेक्ट में देरी

जिला प्रशासन के सूत्रों की मानें तो चिल्ली झील प्रोजेक्ट के लिए सरकार द्वारा जारी किए गए ग्रांट बहुत थी। लेकिन समय पर सही निर्णय ना लिए जाने के चलते हालात हाथ से बाहर हो गए। पिछले पंद्रह साल में चिल्ली झील के आसपास कई निर्माण हो गए। इनमें गोदाम, कालोनियां आदि शामिल हैं। वो वैध हैं या अवैध, ये तो प्रशासनिक जांच के बाद स्पष्ट होगा, लेकिन जमीन का टुकड़ा खरीदने में की गई देरी भी इस प्रोजेक्ट के लटकने का एक अहम कारण बना।
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