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Fatehabad News: स्वच्छ भारत मिशन में बजट नहीं आया तो डस्टबिन खरीद नहीं कर पाया नगर परिषद प्रशासन

Tue, 19 Nov 2024 11:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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फतेहाबाद। शहर को स्वच्छ बनाने का नगर परिषद प्रशासन बेशक दावे कर रहा है लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि मुख्य बाजार और चौक-चौराहों व वार्डों में डस्टबिन ही नहीं है। पांच साल पहले प्लास्टिक डस्टबिन की खरीद हुई थी लेकिन वह टूट गए और जहां लगाए गए थे वहां से गायब हो चुके हैं। करीब एक साल से नगर परिषद प्रशासन डस्टबिन खरीद की प्रक्रिया शुरू करने का दावा कर रहा है लेकिन खरीद नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत बजट ही नहीं आया है। इसी के चलते खरीद नहीं हो पा रही है।
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बताया ये भी जा रहा है कि बजट को लेकर डिमांड ही नहीं की गई है। डिमांड के बाद ही बजट जारी होता है। वहीं जैम पोर्टल भी लॉगइन न होना कारण बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पासवर्ड भूल चुके हैं। हालांकि ईओ सुरेंद्र का कहना है कि बजट आने के बाद जब खरीद की प्रक्रिया शुरू की जाएगी तो जैम पोर्टल को तो लॉगइन करवा दिया जाएगा।

खुले में फेंका जा रहा है साइट पर कचरा
डस्टबिन न होने के चलते खुले में कचरा संग्रह स्थल पर दुकानदारों द्वारा फेंका जा रहा है। हालात ये है कि शहर के शिवालय मार्केट के सामने, भट्टू रोड पर सिवाच अस्पताल के सामने, पुराना एसडीएम निवास के सामने, बीघड़ रोड आदि जगहों पर कचरे के ढेर लगे रहते हैं। नगर परिषद कर्मचारी जिस दिन छुट्टी पर होते हैं और सफाई नहीं होती है तो सड़क पर कचरे के ढेर लग जाते हैं। रविवार को हंस मार्केट में स्थिति और भी ज्यादा खराब हो जाती है।
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छह सालों के स्वच्छता सर्वेक्षण का परिणाम (उत्तर भारत में)
शहर 2023 2022 2021 2020 2019 2018
फतेहाबाद 42
13 27 30 177 191
टोहाना 84
21 60 26 329 289
भूना 174 116 178 105 399 172
रतिया 142
62 130 137 984 572
जाखल 375
303 552 000 000 000

स्वच्छता सर्वेक्षण में कट सकते है नंबर
स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर टीम दुकानदारों का फीडबैक लेगी और व्यवस्था भी जांचेगी। ऐसे में शहर में कचरा डालने के लिए डस्टबिन न होने और खुले कचरा डाले जाने से स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर कट सकते है।

नाइट स्वीपिंग मशीन बंद तो व्यवस्था भी नहीं कर पाया प्रशासन
नगर परिषद प्रशासन ने पार्षदों के विरोध के चलते पिछले साल नाइट स्वीपिंग मशीन को बंद करवा दिया था। मशीन को लेकर नगर परिषद साढ़े चार लाख रुपये हर माह भुगतान कर रहा था। इसके अलावा 50 लीटर रोजाना तेल खर्च भी दिया जा रहा था। हालांकि मशीन बंद करने के बाद नगर परिषद प्रशासन ने नाइट स्वीपिंग को लेकर व्यवस्था नहीं बनाई। इसके पीछे मकसद ये था कि कॉमर्शियल क्षेत्र और मुख्य सड़कों की रात को ही सफाई की जाए और सुबह किसी को दिक्कत न हो सके।
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नगर परिषद की तरफ से स्वच्छता को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। डस्टबिन खरीद की प्रक्रिया को भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
- राजेंद्र सिंह खिंची, प्रधान नगर परिषद

स्वच्छ भारत मिशन दो के तहत बजट नहीं आया है। बजट आने के बाद डस्टबिन की खरीद कर ली जाएगी।
- सुरेंद्र कुमार, ईओ नगर परिषद
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फोटो नंबर 19
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