समैन। गांव भीमेवाला में किसानों की फसलें दोहरी मार झेल रही हैं। एक ओर जहां कई खेतों में जलभराव के कारण सेम की समस्या बनी हुई है वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में खेत सूखे की चपेट में हैं। गांव में इस बार करीब 100 एकड़ से अधिक भूमि पूरी तरह खाली पड़ी है।
किसानों का कहना है कि गांव की भौगोलिक स्थिति के कारण दो अलग-अलग समस्याएं सामने आ रही हैं। कुछ क्षेत्रों में बारिश का पानी जमा हो जाता है जिससे खेतों में सेम की स्थिति बन जाती है। इसके विपरीत ढलान वाले क्षेत्रों में पानी ठहरता नहीं है और सिंचाई के अभाव में खेत सूखे रह जाते हैं। इससे फसलों की बुवाई और उत्पादन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीण किसान सूरजमल, राजबीर, रमेश, बीर, रामफल, रणधीर, रमेंद्र, सुरेश, ओम, लीलू, सोनू, सोहन, टेका और राममेहर ने बताया कि सिंचाई के लिए रजबहा में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है। इसी कारण इस बार खेतों में न तो गेहूं की फसल हुई और न ही पिछले सीजन में धान व नरमा का उत्पादन संभव हो सका।
किसानों का कहना है कि लगातार फसल खराब होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन और सिंचाई विभाग से रजबहा में पानी की आपूर्ति बढ़ाने और जल निकासी की उचित व्यवस्था करने की मांग की है ताकि खेती को बचाया जा सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को राहत मिल सके।
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यह रकबा करीब 100 एकड़ का है। इस जमीन में सिंचाई का पानी बहुत कम लगता है। उनकी प्रशासन व सिंचाई विभाग से मांग है कि इस जमीन के लिए रजबहा में पानी की मात्रा बढ़ाई जाए।
- बलवान सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता भीमेवाला।
:: गांव में 100 एकड़ से अधिक जमीन सिंचाई के अभाव में सूखे की चपेट में है। बारिश के दिनों में इन खेतों का पानी दूसरी तरफ के खेतों में ढलान में चला जाता है। इन खेतों में रजबाहे का पानी बहुत ही कम लगता है। प्रशासन से मांग है कि इन खेतों के लिए रजबहा का पानी बढ़ाया जाए।
- सुरेश कुमार नैन, सरपंच प्रतिनिधि भीमेवाला।