फतेहाबाद। जिले में पिछले कई दिनों से मौसम का मिजाज काफी बदला है। शनिवार को बादलवाही रही। जिससे दिनभर ठंडक महसूस की गई। बढ़ी ठंड रबी फसलों के लिए काफी लाभदायक है। खासकर गेंहू की फसल के लिए।
इस बार फरवरी माह की शुरुआत में बढ़ती गर्मी ने किसानों की चिंता को बढ़ा दिया था। इसके बाद अब बुधवार और वीरवार को जिले में कहीं बूंदाबांदी तो कहीं बारिश ने गेहूं फसल की खेती करने वाले किसानों के चेहरे पर खुशी ला दी। जिले में बुधवार और गुरुवार की रात हुई बारिश से किसानों को राहत मिली है। यह बारिश गेहूं की फसल के लिए अमृत की तरह है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकतम तापमान में वृद्धि, जो कि 26 डिग्री तक पहुंच गया था इसने किसानों में चिंता पैदा कर दी थी, लेकिन अब बारिश से तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस की कमी आई है। इससे गेहूं की फसल की वृद्धि और पैदावार में सहायता मिलेगी। तापमान में गिरावट के साथ शनिवार को जिले का अधिकतम तापमान 23 डिग्री और न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।
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गेहूं के लिए फायदेमंद है बारिश डॉ. बहादुर
तापमान में गिरावट को लेकर कृषि विकास अधिकारी डॉ. बहादुर सिंह गोदारा ने कहा कि बारिश से हवा में नमी बढ़ गई है, जो कि गेहूं की फसल के लिए बहुत फायदेमंद है। गेहूं व सरसों की फसल में अभी दाना बनने और भरने का समय चल रहा है। तापमान में गिरावट से बेहतर उपज में योगदान मिलेगा। गेहूं की फसल के लिए अधिकतम तापमान 22 से लेकर 25 डिग्री के बीच होना चाहिए, जो कि इस समय चल रहा है। इससे उम्मीद है कि फसल के उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। वहीं मौसम में परिवर्तन से नमी के बढ़ते स्तर के कारण तेला चेपा रोगों के प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है। इसके लिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों पर किसी भी प्रकार के लक्षण के लिए बारीकी से निगरानी करें और गेहूं की पैदावार को बढ़ाने के लिए सूक्ष्म तत्वों का छिड़काव कर सकते हैं।
:: जिले में मौसम आमतौर पर 26 फरवरी तक परिवर्तनशील परंतु खुश्क रहने की संभावना है। इस दौरान 24 फरवरी तक उत्तर व उत्तर पश्चिमी हवाएं हल्की से मध्यम गति से चलने से रात्रि तापमान में हल्की गिरावट आने की संभावना है। परंतु 25 व 26 फरवरी के दौरान पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव से बीच-बीच में हवाओं में बदलाव आने से राज्य में बीच बीच में कहीं कहीं आंशिक बादलवाही रहने की संभावना है जिससे दिन के तापमान में हल्की गिरावट आने की संभावना है।
-डॉ. मदनलाल खिचड़, विभागाध्यक्ष मौसम विज्ञान विभाग, एचएयू हिसार।