रतिया। दिव्यांगता को चुनौती मानकर भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम में अपनी पहचान बनाने वाले रविंद्र पाल कंबोज और मलकीत सिंह ने क्षेत्र का नाम रोशन किया है। ये दोनों खिलाड़ी अपने-अपने खेलों में न केवल देश बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना चुके हैं, जिससे क्षेत्र के लोग गर्व महसूस करते हैं।गांव नंगल के निवासी रविंद्र पाल कंबोज ने दिव्यांग होने के बावजूद क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ी है। वह भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम के कप्तान के रूप में कई यादगार पारियां खेल चुके हैं। रविंद्र का क्रिकेट सफर दिसंबर 2014 में श्रीलंकाई टीम के खिलाफ तीन मैचों की शृंखला से शुरू हुआ, जब उन्हें भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम का कप्तान चुना गया था।
फरवरी 2015 में रविंद्र की कप्तानी में भारतीय टीम ने एशिया कप दिव्यांग क्रिकेट प्रतियोगिता में जीत हासिल की। इसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और अफगानिस्तान की टीमों ने भाग लिया था। इस जीत के बाद रविंद्र का आत्मविश्वास और बढ़ा और वह अपने एक हाथ से क्रिकेट खेलते हुए अनेकों रिकॉर्ड बनाने में सफल रहे।
रविंद्र बताते हैं कि एक मैच के दौरान उन्होंने श्रीलंकाई टीम के खिलाफ बल्लेबाजी करते हुए एक हाथ से 96 मीटर लंबा छक्का मारा। इस पर श्रीलंका की राष्ट्रीय टीम के कप्तान रह चुके अर्जुन रणतुंगा ने खुद आकर बधाई दी और कहा कि उन्होंने अपने पूरे कॅरिअर में ऐसा छक्का नहीं मारा था।
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हादसे से जूझते हुए क्रिकेट को अपनाया
3 जुलाई, 2000 को रविंद्र का बायां हाथ एक चारा काटने वाली मशीन में आ गया, जिससे उनका हाथ कट गया। यह हादसा उनके लिए बहुत बड़ा झटका था, लेकिन उसने अपनी जिद और मेहनत से इस कठिनाई को पार किया। इसके बाद उन्होंने कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर क्रिकेट खेलना जारी रखा। एक दिन चंडीगढ़ किसी पार्क में बैठे थे। वहां उन्हें चंडीगढ़ दिव्यांग क्रिकेट टीम के मैनेजर सरदार हरेंद्र पाल सिंह मिले। जिन्होंने उन्हें प्रेरित किया और राष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेट टूर्नामेंट में खेलने का मौका दिया।
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वॉलीबाल में भी बने सफलता की मिसाल
रविंद्र ने क्रिकेट के साथ-साथ 2023 में भारत की दिव्यांग वॉलीबाल टीम में भी प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने कजाकिस्तान में खेलते हुए भारत को वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करवाया। अब वह समय-समय पर क्रिकेट और वॉलीबाल दोनों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं और देश के लिए नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।
मलकीत सिंह की खेल में सफलता
वहीं, गांव जापतेवाला के मलकीत सिंह ने भी दिव्यांग क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई है। मलकीत ने 2015 में भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम में जगह बनाई और तब से लेकर अब तक छह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। उन्होंने 2015 में थाईलैंड में आयोजित एशिया कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया और टीम को शानदार जीत दिलाई। इसके बाद 2016 में श्रीलंका के खिलाफ खेलते हुए मलकीत ने भारतीय टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई और मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार भी जीता। मलकीत सिंह ने 2017 में थाईलैंड में आयोजित त्रिकोणीय सीरीज में भी भाग लिया और भारत की जीत में योगदान दिया। 2018 में भारत-नेपाल सीरीज में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और टीम को जीत दिलाई।
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राज्य स्तर पर पैरा एथलीट और वॉलीबाल के रूप में बनाई पहचान
क्रिकेट के अलावा, मलकीत सिंह ने पैरा एथलीट के रूप में भी राज्य स्तर पर पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनका खेल और संघर्ष युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, और वह साबित करते हैं कि दिव्यांगता कोई बड़ी बाधा नहीं है। वहीं मलकीत ने वॉलीबाल में भी अपनी प्रतिभा दिखाई है। राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें हरियाणा वॉलीबाल टीम में भी जगह मिली। उन्होंने राष्ट्रीय वॉलीबाल प्रतियोगिता में भी भाग लिया और टीम को तीसरा स्थान दिलाया।
दिव्यांग खिलाड़ी रविंद्र पाल कंबोज:स्त्रोत स्वयं