फतेहाबाद। जिला मुख्यालय पर बैठे जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को शहर की गलियों में टूटे-फूटे सीवर के ढक्कन नजर नहीं आते हैं। शहर के 27 वार्डों में कहीं सीवर के ढक्कन टेढ़े लगे हैं तो कहीं टूट चुके हैं। 50 से ज्यादा इंटरलॉकिंग गलियों में तो सीवर के ढक्कन की जगह धंस चुकी हैं। अब धुंध बढ़ने पर कभी भी हादसे हो सकते हैं। यह शहर की प्रमुख समस्याओं से एक है।ऐसा नहीं है कि अधिकारियों को इनकी सूचना नहीं है। समय-समय पर लोग शिकायतें करते हैं। मगर गंभीरता के साथ सीवर के ढक्कनों को ठीक करवाने या नए लगवाने की जहमत नहीं उठाई जाती। इसके लिए भी राजनीतिक दबाव की जरूरत रहती है। शहरवासी गोपाल चंद, बजरंग कुमार, रामनिवास, दलीप चंद, अशोक कुमार, विजय सिंह, महेंद्र सिंह आदि बताते हैं कि शहर में सीवर लाइन के मैनहोल पर रखे ढक्कन बार-बार टूट रहे हैं। ढक्कन टूटने से मलबा मैनहोल में ही गिर जाता है। इससे मैनहोल खुला हो जाता है। खुले मैनहोल से हर समय हादसा होने की आशंका बनी रहती है। शहरवासियों का आरोप है कि जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा निम्न गुणवत्ता के ढक्कनों का प्रयोग किया जा रहा है। वहीं विभाग का तर्क है कि वाहनों की आवाजाही से ढक्कन कमजोर हो जाता है, जिससे बार-बार ढक्कन टूटने की समस्या हो रही है। शहर में पानी निकासी के लिए सीवर लाइन दबा रखी है। वहीं, सीवरों की सफाई हो सके, इसलिए मैनहोल बनाए गए हैं। अधिकांश मैनहोल सड़कों और कॉलोनियों की गलियों के बीचों-बीच बने हुए हैं।
इन क्षेत्र में सबसे अधिक स्थिति खराब
शहर की नहर कॉलोनी, अग्रवाल कॉलोनी, भट्टू रोड, डीएसपी रोड, एमसी कॉलोनी, चार मरला कॉलोनी, लाजपत चौक, पुरानी तहसील चौक सहित शहर के अधिकांश हिस्सों में मैनहोल या तो टूटे हुए हैं अथवा धंस चुके हैं। शहर में करीब 150 मैनहोल धंसे हुए हैं, जिनको अभी भी मरम्मत की दरकार है। पार्षदों की ओर से हाउस की बैठक में समस्या रखी जाती है, तब जनस्वास्थ्य कुछ ढक्कन ठीक करवा देता है। बाद में संभालने के लिए कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती है।
कहीं टेढ़े तो कहीं गली से ऊंचे उठा रखे सीवर के ढक्कन
सर्दी का मौसम आरंभ हो गया है और दिन व रात को धुंध भी छाने लगी है। ऐसे में सुबह व शाम के समय लोगों को यह टूटे मैनहोल दिखाई नहीं देंगे और हादसों का खतरा बढ़ गया है। शहर निवासी सुरेंद्र, दिनेश, रवि, आकाश, दिलबर का कहना है कि शहर में बने मैनहोल की गहराई पांच से 10 फुट तक है। ऐसे में टूटे हुए मैनहोल के ढक्कनों से हादसों का खतरा गहरा गया है। संबंधित विभाग को इसकी सार-संभाल करनी चाहिए।
कोट
जैसे ही किसी मैनहोल के टूटने की सूचना मिलती है, उसकी तुरंत मरम्मत की जाती है। अगर शहर में अभी भी सीवर के ढक्कन टूटे हुए या धंसे हुए हैं, तो उनकी मरम्मत करवाई जाएगी।
-सतपाल रोहज, एसडीओ, जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग, फतेहाबाद