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ग्रामीण विकास शुल्क कम करने से गांवों में रुक जाएंगे विकास कार्य : किसान

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राज्य सरकार ने कृषि संबंधित नए बिल लागू होने के बाद मार्केट और रुरल डेवलपमेंट फीस को दो-दो प्रतिशत से कम करके आधा-आधा प्रतिशत करने की घोषणा का व्यापारियों स्वागत किया है जबकि किसानों ने कहा कि यह फीस कम करने से उन्हें नुकसान है। आढ़तियों ने कहा कि इससे मंडी में व्यापार बढ़ेगा और किसानों ने कहा कि रुरल डेवलपमेंट फीस कम करने से उनके विकास कार्य ठप्प हो जाएंगे। मालूम हो कि पहले मार्केट फीस और रूरल डेवलपमेंट फीस दो-दो फीसदी थी जिसे अब कम करके 0.5 फीसदी कर दिया गया है। यानी कि यह फीस पहले चार फीसदी थी उसे घटाकर एक प्रतिशत किया है।
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इस बारे में ये बोले किसान औरआढ़ती
आढ़ती गुरदीप सिंह ने कहा कि मार्केट फीस और एचआरडीएफ चार फीसदी से एक फीसदी करने से अनाज मंडी का व्यापार बढ़ेगा। मुख्य कारण यह है कि मंडी में खरीदने वाली फर्मों से चार फीसदी फीस वसूली जाती थी जो कम होकर एक फीस हो गई है। अब प्राईवेट खरीद एजेंसियां मंडी में आकर धान इत्यादि की फसलेें खरीदेगी। अब सरकार ने यह सहूलियत दी है कि किसान के पास विकल्प होगा कि वह आढ़ती की मार्फत फसल की पेमेंट ले या सीधे अपने बैंक खाते से।
मंडी के व्यापारी गोपाल चौधरी ने कहा कि सरकार ने मंडी में बिकने वाली फसल के लिए एमएसपी तो बढ़ दिया। इस बात की क्या गारंटी है कि मंडी से बाहर या गांव में कोई खरीद एजेंसी कम या ज्यादा भाव पर किसान से फसल नहीं खरीदेगी। उन्होंने उदाहरण दिया कि मंडी में फसल एक निश्चित समय पर खरीदी जाती है। प्राइवेट खरीद एजेंसियां किसान के घर जाकर फसल सरकारी खरीद से पहले ही खरीद लेेगी। जैसे सरकारी खरीद से पहले बाजरा इन दिनों 500 रुपये कम बेचने को किसान मजबूर है।
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उन्होंने कहा कि बिहार और यूपी का धान पंजाब व हरियाणा में आकर इसलिए बिकता है कि वहां सरकार किसानों से एमएसपी पर धान की खरीद नहीं करती। अब अगर ओपन मार्केट हो गई तो यहां भी बिहार और यूपी जैसा हाल हो सकता है।
सर्व खाप पंचायत के राष्ट्रीय प्रवक्ता सूबे सिंह समैण ने कहा कि मार्केट फीस से न किसानों को पहले नुकसान था ना अब फायदा हुआ है लेकिन एचआरडीएफ फीस कम होने से गांव के साथ ग्रामीणों को नुकसान होगा। समैण ने कहा कि पहले इस पैसे से गांव तक की सड़कों का निर्माण होता था। अब जब राजस्व ही नहीं होगा तो ग्रामीण विकास कैसे होगा। सूबे सिंह ने कहा कि इससे स्थिति ओर स्पष्ट हो गई कि सररकार बड़े व छोटे व्यापारी की ही है। किसान हित का सरकार को कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक किसान को फायदा नहीं होता किसान चुप नहीं होगा।
किसान नेता मनदीप नथवान ने कहा कि तीनों अध्यादेश अब कानून बना दिए। कानून में एमएसपी का जिक्र नहीं है। प्रदेश सरकार ने रोते बच्चे के मुंह में खिलौना देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जब मंडियां ही नहीं रहेगी तो मार्केट कमेटी कहां रहेगी। मार्केट फीस कम करने से पहले मार्केट कमेटियां ही बंद हो जाएगी ऐसे में फीस कम करना हास्यपद लग रहा है।
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