बद्रीनाथ की त्रासदी को याद कर बेशक जिले के लोग सहम जाते हैं लेकिन भगवान के प्रति उनकी निष्ठा में कमी नहीं आई है। उनका कहना है कि इस बार भी वे ब्रदीनाथ धाम जाएंगे।
हालांकि लोगों ने बद्रीधाम की त्रासदी को काफी करीब से देखा था। बीते वर्ष उत्तराखंड के चार धामों में फतेहाबाद के 5 परिवारों के 12 लोग आज भी त्रासदी को भूले नहीं हैं। केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ की यात्रा पर यहां से गए लोगों को 8 दिन तक भारत सेवा संघ की शरण में रहना पड़ा था।
5 दिनों तक इनका अपने परिवार के साथ संपर्क नहीं हो पाया था और तीनों महिलाएं बीमार हो गई थीं। 9 दिन बाद इनकी हालत को देखते हुए भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर ने उन्हें जोशीमढ़ पहुंचाया। लेकिन आज भी उनमें भगवान के प्रति श्रद्धा कम नहीं हुई है।
लाजपत नगर निवासी 65 वर्षीय सत्या देवी सरदाना ने बताया कि वह पानीपत की महिला संत माधुरी माता के साथ 15 जून को बद्रीनाथ के लिए रवाना हुई थीं। उनके साथ उनका 12 वर्षीय पौत्र वल्लभ दोहती नंदना भी था। इसके अलावा उसकी बहन ऊषा चुघ और पौत्री भानू चुघ भी थी।
सत्या देवी ने बताया कि 16 जून को उन्हें वापस आना था। सुबह 5 बजे वे लोग बस में बैठे थे लेकिन इस दौरान तेज बरसात शुरू हो गई वह दोपहर 2 बजे तक भूखे-प्यासे बस में ही बैठे रहे। इसी दौरान वहां घोषणा की गई कि भूस्खलन हुआ है। बसें नहीं चल पाएंगी। जहां भी सुरक्षित ठिकाना मिलता है यात्री वहां ठहर जाएं। उन्होंने वहां भारत सेवा संघ के यहां शरण ली।
8 दिनों तक नहीं हो पाया परिजनों से संपर्क
घर से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था। न तो पीने को पानी था, न बिजली॥ इसके अलावा वहां खाना काफी मंहगा था। तीनों महिलाएं बीमार हो गईं। ऊपर से बच्चों की भी परेशानी थी। 8 दिन जैसे-तैसे उन्होंने वहीं गुजारे। उनकी हालात को देखते हुए भारतीय सेना ने अपने हेलीकॉप्टर में बैठाकर जोशीमढ़ पहुंचाया।
जहां उनके परिजन पहुंचे हुए थे। सत्या देवी ने बताया कि हादसे के बाद उनकी तबियत में कोई ज्यादा सुधार नहीं आया। अब थोड़ी-बहुत रिकवरी है।
इस बार भी 8 मई को जाऐंगे बद्रीनाथ
सत्या देवी ने कहा कि उनकी भगवान के प्रति अटूट निष्ठा है। इस बार वह परिवार के साथ 8 मई को बद्रीनाथ के लिए रवाना होंगी।
अभी भी लगाएेंगे मेडिकल कैंप
इसी तरह बद्रीनाथ त्रासदी से एक दिन पहले वापस लौटे फतेहाबाद के मनमोहन मिढ़ा ने बताया कि वह अपनी पत्नी व पुत्री के साथ केदारनाथ गए थे। वह वहां हर वर्ष मेडिकल कैंप लगाते हैं। इसके लिए उसके साथ डॉ. सिद्धार्थ वधवा और दो अन्य मित्रों का परिवार था। केदारनाथ में बरसात शुरू हुई तो वह वहां से निकल पडे़ थे।
उन्हें रास्ते में पता लगा कि भूस्खलन हुआ है। उन्होंने कहा कि त्रासदी से उनकी निष्ठा कम नहीं हुई। इस बार भी मेडिकल कैंप के लिए वहां जाऐंगे।
अधिकारियों को नहीं है जानकारी
चारधाम की यात्रा के दौरान पिछली बार हुई त्रासदी के लिए हरियाणा सरकार ने देहरादून में हरियाणा के लोगों के लिए मुख्यालय बनाया था। जहां पर हरियाणा के लोगों को सुरक्षित रखा जाना था। फतेहाबाद के तहसीलदार दर्शन सिंह की वहां ड्यूटी लगी थी। जिन्होंने इस क्षेत्र के काफी लोगों को यहां सुरक्षित पहुंचाया था।
त्रासदी के बाद तत्कालीन उपायुक्त ने कहा था कि धाम के लिए जाने वाले यात्रियों के लिए यहां रजिस्ट्रेशन करवाया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में यात्रियों की पहचान हो सके। लेकिन इस बार रजिस्ट्रेशन करना तो दूर की बात किसी अधिकारी को इस बारे में कुछ पता ही नहीं।
चारधाम की यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन के लिए जिला राजस्व अधिकारी रामसिंह बिशभनोई से पूछा गया तो उन्हाेंने कहा कि पिछली बार नगराधीश का पद खाली था इसलिए उनके पास जिम्मेदारी थी। अब उनके पास इस तरह की कोई जिम्मेदारी नहीं है। वहीं नगराधीश सुरजीत सिंह नैन से श्रद्धालुओं के रजिस्ट्रेशन व पहचान पत्र इत्यादि के बारे में जानकारी लेनी चाहिए तो उन्होंने कहा कि मेरे नोटिस में ऐसी कोई बात नहीं है।