टोहाना। रतिया रोड स्थित एक निजी पैलेस में रविवार को अरोड़ा-खत्री समाज ने महाराजा अरूट जयंती महोत्सव उत्साहपूर्वक मनाया। समारोह में समाज के सैकड़ों लोगों ने भाग लिया और महाराजा अरूट के जीवन विचारों तथा समाज निर्माण में उनके योगदान को याद किया। कार्यक्रम के दौरान प्रदेशभर में महाराजा अरूट के नाम पर चौक और मुख्य द्वार बनाने की मांग भी उठी।
कार्यक्रम में हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण मिड्ढा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ राज्यसभा सदस्य सुभाष बराला, हांसी विधायक विनोद भ्याना तथा यमुनानगर विधायक घनश्याम दास भी मौजूद रहे। मंच पर पहुंचने पर सभी अतिथियों का पारंपरिक पगड़ी और पटका पहनाकर स्वागत किया गया। समारोह की अध्यक्षता पूर्व उपप्रधान प्रतिनिधि रविंद्र मेहता और स्वीटी मेहता ने की।
रविंद्र मेहता ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जिले और विधानसभा क्षेत्र में महाराजा अरूट के नाम पर चौक और मुख्य द्वार स्थापित किए जाने चाहिए ताकि नई पीढ़ी उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सके। डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने कहा कि यदि समाज एकजुट होकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के समक्ष अपनी बात रखेगा तो अन्य महापुरुषों की जयंती की तरह महाराजा अरूट की जयंती भी जल्द प्रदेश स्तर पर मनाई जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने महापुरुषों की जयंती मनाने की परंपरा शुरू की थी जिसे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी आगे बढ़ा रहे हैं।राज्यसभा सदस्य सुभाष बराला ने अरोड़ा-खत्री समाज के प्रदेश और राष्ट्र निर्माण में योगदान की सराहना की। हांसी विधायक विनोद भ्याना तथा अन्य वक्ताओं ने समाज से संगठित रहने और शिक्षा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
यमुनानगर विधायक घनश्याम दास ने बताया कि उनके क्षेत्र में महाराजा अरूट चौक का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि जो समाज अपना इतिहास भूल जाता है, उसका अस्तित्व कमजोर पड़ जाता है। इसलिए अपनी जड़ों और विरासत को याद रखना आवश्यक है। इस अवसर पर डॉ. शिव सचदेवा, संस्थापक रिंकू ग्रोवर, अशोक तनेजा, मनदीप ग्रोवर, अनिता मेहता, लवली मोंगा, नंदी डारा, जाखल नपा अध्यक्ष विकास कामरा आदि मौजूद रहे।
नेता का भाषण पूरा होने तक बैठे रहना चाहिए
डिप्टी स्पीकर कृष्ण मिड्ढा ने समारोह के बीच भीड़ के जल्दी उठकर जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सुभाष बराला के समाज के लोग 50 हजार की संख्या में धूप में बैठकर कार्यक्रम सुनते हैं। मिड्ढा ने कहा, जब तक मंच से बोलने वाला नेता अपनी बात पूरी न कर लें तब तक उठकर नहीं जाना चाहिए। यह अनुशासन और सम्मान की बात है। मिड्ढा ने 14 अगस्त को मनाए जाने वाले विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का जिक्र करते हुए कहा कि 1947 में सिर्फ पंजाबी ही नहीं आए थे। ब्राह्मण पंचकूला-पिंजौर गए, जाट राजस्थान चले गए और वाल्मीकि समाज आज भी जींद में है। जगह बदलने वाले लोगों को रिफ्यूजी कहना गलत है।