जाखल। जाखल में वर्षों से नहरी पानी की मांग अधूरी है। यहां स्वच्छ नहरी पानी शहरवासियों के लिए आज भी सपना बना हुआ है। प्रशासन की मानें तो शहर में नहरी पानी की उपलब्धता के लिए प्रक्रिया चल रही है लेकिन उपयुक्त भूमि की अनुपलब्धता के कारण प्रक्रिया बरसों से अधर में लटक रहीं है।
शहर के लोगों की यह बहुप्रतीक्षित मांग कब पूरी होगी। फिलहाल यह कुछ स्पष्ट नहीं है। इसके चलते शहर की हजारों की आबादी को पेयजल के लिए पूरी तरह ट्यूबवेल और भूमिगत जल पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
जाखल शहर में 14 वार्ड हैं और करीब 16 हजार की आबादी है। शहरवासी लंबे समय से नहरी पानी की मांग कर रहे हैं। वर्षों से यह मांग राजनीतिक मंचों से लेकर प्रशासनिक बैठकों तक भी गूंजती रहीं है लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस परिणाम दिखाई नहीं दिया है।
नतीजतन इससे जाखल में लोग भाखड़ा आधारित जल से वंचित हैं जिसके चलते पेयजल की आपूर्ति ट्यूबवेल के माध्यम से ही हो रही है। इस स्थिति में गर्मी के मौसम में पानी की मांग बढ़ने से व्यवस्था चरमरा जाती है। कई क्षेत्रों में कम दबाव से पानी पहुंचता है तो कई जगह जलापूर्ति के समय में कटौती करनी पड़ती है।
शहरवासी दीपक खनेजा, कांत जैन, जतिंदर शर्मा, किरण शर्मा, विनोद, राम कुमार, जगतार सिंह का कहना है कि इससे दूषित भूजल और ट्यूबवेल आधारित जलापूर्ति से शहर के लोगों में स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ रही है।
आबादी बढ़ी, पेयजल व्यवस्था में नहीं हुआ सुधार
पिछले कुछ वर्षों में जाखल शहर का विस्तार तेजी से हुआ है। नए वार्ड और कई कॉलोनियां भी बस गई हैं लेकिन पेयजल व्यवस्था उसी पुराने ढांचे पर टिकी हुई है। ऐसे में भविष्य में पानी की मांग और अधिक बढ़ने की संभावना है।
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चुनावों में बनता है बड़ा मुद्दा
जाखल में लगभग हर चुनाव के दौरान भाखड़ा आधारित जल की उपलब्धता का मुद्दा उठता रहा है। राजनीतिक दल लोगों से जल्द भाखड़ा का स्वच्छ पानी मुहैया कराने के वादे भी करते है लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद यह मुद्दा फिर शांत कर दिया जाता है।
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भूमि मिलेगी तो आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जाखल तक भाखड़ा का पानी पहुंचाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए उपयुक्त भूमि की अनुपलब्धता बाधा बन रही है। इस परियोजना के लिए पांच-छह एकड़ भूमि की आवश्यकता है। यदि उपयुक्त भूमि उपलब्ध हो जाती है तो परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज किया जा सकता है।
-मुख्यतार सिंह, जेई जनस्वास्थ्य विभाग टोहाना