रतिया। नेशनल डिफेंस एकेडमी में चयनित दीपांशु।
रतिया। मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इस कहावत को गांव तामसपुरा निवासी दीपांशु ने चरितार्थ कर दिखाया है। दीपांशु ने कठिन पारिवारिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद अपने पहले ही प्रयास में नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) की परीक्षा पास कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
दीपांशु ने बताया कि उन्होंने भारतीय सेना में अधिकारी बनने का लक्ष्य 9वीं कक्षा में ही तय कर लिया था। जब वह 11वीं कक्षा में हुआ तो उसने एनडीए पर ध्यान केंद्रित किया। परीक्षा में सफलता के लिए वह रोजाना करीब 6 घंटे पढ़ाई करते थे। तैयारी का मुख्य जरिया ऑनलाइन माध्यम और यूट्यूब रहा। लिखित परीक्षा सितंबर 2025 में हुई थी। इसके बाद जनवरी में विशाखापत्तनम में उनका इंटरव्यू हुआ। अब दीपांशु जुलाई में पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में अपनी ट्रेनिंग शुरू करेंगे।
दीपांशु का छोटा भाई नीरज (15) है। वह भी दसवीं कक्षा का विद्यार्थी है।
:: 10 साल पहले हुआ था पिता का निधन
करीब 10 साल पहले दीपांशु के पिता भरत सिंह का निधन हो गया था। पिता के निधन के बाद मां ममता रानी ने हार नहीं मानीं। परिवार की आय का साधन 4 एकड़ जमीन से हो रही आय और पेंशन ही रही। मां ममता रानी ने बताया कि उन्होंने दीपांशु की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। अपनी इस उपलब्धि पर दीपांशु ने कहा की उनकी सफलता का श्रेय मां, दादी प्रेम देवी और शिक्षकों को जाता है। तैयारी के दौरान मैं अपने मामा के घर भूना में रहा। वहां नियमित रूप से तैयारी कर सफलता प्राप्त की।